विष्णु शतनाम स्तोत्रम्

नारद उवाच ऊँ वासुदेवं हृषीकेशं वामनं जलशायिनम्। जनार्दनं  हरिं  कृष्णं श्रीवक्षं गरुडध्वजम्।।   वाराहं  पुण्डरीकाक्षं  नृसिंहं नरकान्तकम्। अव्यक्तं शाश्वतं विष्णुमनन्तमजमव्ययम्।।

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गोविन्द दामोदर स्तोत्रम्

अग्रे कुरूणामथ दु:शासनेनाहृतवस्त्रकेशा । कृष्णा   तदाक्रोशदनन्यनाथा    गोविन्द    दामोदर   माधवेति ।।1।।   श्रीकृष्ण  विष्णो  मधुकैटभारे  भक्तानुकम्पिन्  भगवन्  मुरारे । त्रायस्व   मां

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षट्पदी स्तोत्रं

अविनयमपनय विष्णो दमय मन: शमय विषयमृगतृष्णाम्। भूतदयां     विस्तारय      तारय             संसारसागरत:।।1।। अर्थ – हे विष्णु भगवान! मेरी उद्दण्डता दूर कीजिए, मेरे

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श्रीमृत्युंजयस्तोत्रम्

रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रृंगनिकेतनं शिंजिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम्। क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवन्दितं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:।।1।।   पंचपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजद्वयशोभितं भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम्। भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं

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श्रीमदाद्यशंकराचार्यकृत – श्रीहनुमत्पंचरत्न स्तोत्रम्

इस स्तोत्र के जाप से पूर्व हनुमान जी के चित्र का इंतजाम कर लेना चाहिए क्योंकि उनके चित्र अथवा मूर्त्ति

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