द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम – Dwadash Jyotirlingam Stotram
इस स्तोत्र का जप जो भी व्यक्ति प्रतिदिन करता है उसे बारह ज्योतिर्लिंगो जैसे दर्शन करने के समान फल की
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इस स्तोत्र का जप जो भी व्यक्ति प्रतिदिन करता है उसे बारह ज्योतिर्लिंगो जैसे दर्शन करने के समान फल की
इस पाठ की एक माला प्रतिदिन करने से मनोकामना पूर्ण होती है, ऎसा माना गया है. रघुपति राघव राजाराम ।
मुनीन्द्र-वृन्द वन्दिते त्रिलोक-शोक-हारिणि प्रसन्न-वक्त्र-पंकजे निकुंज-भू-विलासिनि । व्रजेन्द्र-भानु-नन्दिनि व्रजेन्द्र-सूनु-संगते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम ।।1।। अशोक-वृक्ष-वल्लरी-वितान-मण्डप-स्थिते प्रवाल-बालपल्लव-प्रभारूणाड़्घ्रि-कोमले । वराभय-स्फुरत-करे प्रभूत-सम्पदालये कदा करिष्यसीहे
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिंग निर्मलभासित शोभितलिंगम । जन्मजदु:खविनाशकलिंगं तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम ।।1।। देवमुनिप्रवरार्चितलिंगं कामदहं करुणाकरलिंगम । रावणदर्पविनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम ।।2।। सर्वसुगंधिसुलेपित लिंगं बुद्धि
देवि सुरेश्वरि भगति गंगे त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे । शंकरमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ।।1।। भागीरथि सुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यात:
सूर्योsर्यमा भगस्त्वष्टा पूषार्क: सविता रवि: । गभस्तिमानज: कालो मृत्युर्धाता प्रभाकर: ।।1।। पृथिव्यापश्च तेजश्च खं वयुश्च परायणम । सोमो बृहस्पति: शुक्रो