कार्तिक माह माहात्म्य – बत्तीसवाँ अध्याय

मुझे सहारा है तेरा, सब जग के पालनहार। कार्तिक मास के माहात्म्य का बत्तीसवाँ विस्तार।। भगवान श्रीकृष्ण ने आगे कहा

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कार्तिक माह माहात्म्य – इक्कतीसवाँ अध्याय

कार्तिक मास माहात्म्य का, यह इकत्तीसवाँ अध्याय। बतलाया भगवान ने, प्रभु स्मरण का सरल उपाय।। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा –

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कार्तिक माह माहात्म्य – तीसवाँ अध्याय

कार्तिक मास की कथा, करती भव से पार। तीसवाँ अध्याय लिखूँ हुई हरि कृपा अपार।। भगवान श्रीकृष्ण सत्यभामा से बोले

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कार्तिक माह माहात्म्य – उन्नत्तीसवाँ अध्याय

प्रभु कृपा से लिख रहा, सुन्दर शब्द सजाय। कार्तिक मास माहात्म का, उन्तीसवाँ अध्याय।। राजा पृथु ने कहा – हे

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कार्तिक माह माहात्म्य – अठ्ठाईसवाँ अध्याय

पढ़े सुने जो प्रेम से, वह हो जाये शुद्ध स्वरुप। यह अठ्ठाईसवाँ अध्याय कार्तिक कथा अनूप।। धर्मदत्त ने पूछा –

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कार्तिक माह माहात्म्य – सत्ताईसवाँ अध्याय

कृष्ण नाम का आसरा, कृष्ण नाम का ध्यान। सत्ताईसवाँ अध्याय अब, लिखने लगा महान।। पार्षदों ने कहा – एक दिन

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