कार्तिक माह महात्म्य – इक्कीसवाँ अध्याय

लिखने लगा हूँ श्रीहरि के, चरणों में शीश नवाय। कार्तिक माहात्म का बने, यह इक्कीसवाँ अध्याय।। अब ब्रह्मा आदि देवता

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कार्तिक माह माहात्म्य – बीसवाँ अध्याय

माँ शारदा की प्रेरणा, स्वयं सहाय। कार्तिक माहात्म का लिखूं, यह बीसवाँ अध्याय।। अब राजा पृथु ने पूछा – हे

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कार्तिक माह माहात्म्य – उन्नीसवाँ अध्याय

श्री विष्णु मम् हृदय में, प्रेरणा करने वाले नाथ। लिखूँ माहात्म कार्तिक, राखो सिर पर हाथ।। राजा पृथु ने पूछा

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कार्तिक माह माहात्म्य – सत्रहवां अध्याय

भक्ति से भरे भाव हे हरि मेरे मन उपजाओ। सत्रहवां अध्याय कार्तिक, कृपा दृष्टि कर जाओ।। उस समय शिवजी के

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कार्तिक माह माहात्म्य – पंद्रहवाँ अध्याय

श्री विष्णु भगवान की कृपा, हो सब पर अपरम्पार। कार्तिक मास का ‘कमल” करे पन्द्रहवाँ विस्तार।। राजा पृथु ने नारद

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