कार्तिक माह माहात्म्य – दसवाँ अध्याय
मायापति नारायण के, चरणों में सीस नवाय। दसवाँ अध्याय कार्तिक, लिखूं नारायण राय।। राजा पृथु बोले – हे ऋषिश्रेष्ठ नारद
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मायापति नारायण के, चरणों में सीस नवाय। दसवाँ अध्याय कार्तिक, लिखूं नारायण राय।। राजा पृथु बोले – हे ऋषिश्रेष्ठ नारद
जो पढ़े सुनेगा इसे, वह होगा भव से पार। श्री हरि कृपा से लिख रहा, नवम अध्याय का सार।। राजा
जिसकी दया से सरस्वती, भाव रही उपजाय। कार्तिक माहात्म का ‘कमल’ लिखे आठवाँ अध्याय।। नारदजी बोले – अब मैं कार्तिक
मंगलकारी श्री हरि का, सच्चा नाम ध्याऊं। कार्तिक मास माहात्म्य का, सातवाँ अध्याय बनाऊँ।। नारद जी ने कहा – हे
जिसके सुनने से सब पाप नाश हो जाये। कार्तिक माहात्म्य का, लिखूं छठा अध्याय।। नारद जी बोले – जब दो
प्रभु मुझे सहारा है तेरा, जग के पालनहार। कार्तिक मास माहात्म की, कथा करूँ विस्तार।। राजा पृथु बोले – हे