श्री ललिता त्रिशती
ऊँ ककार रूपा कल्याणी कल्याण गुण शालिनी। कल्याण शैलनिलया कमनीया कलावती।।1।। कमलाक्षी कल्मषघ्नी करुणामृतसागरा। कदम्ब कानन आवासा कदम्बकुसुमप्रिया।।2।। कंदर्पविद्या कंदर्प
Astrology, Mantra and Dharma
ऊँ ककार रूपा कल्याणी कल्याण गुण शालिनी। कल्याण शैलनिलया कमनीया कलावती।।1।। कमलाक्षी कल्मषघ्नी करुणामृतसागरा। कदम्ब कानन आवासा कदम्बकुसुमप्रिया।।2।। कंदर्पविद्या कंदर्प
कार्तवीर्य कहने लगा कि हे भगवान! वह राक्षस कौन था? और कांचन मालिनी कौन थी? उसने अपना धर्म कैसे दिया
राजा के ऎसे वचन सुनकर तपस्वी कहने लगा कि हे राजन्! भगवान सूर्य बहुत शीघ्र उदय होने वाले हैं इसलिए
महर्षि श्री मार्कडेयजी बोले – निर्मल ज्ञानरूपी शरीर धारण करने वाले, देवत्रयी रूप दिव्य तीन नेत्र वाले, जो कल्याण प्राप्ति
नमश्चण्डिकायै नम: मार्कण्डेयजी कहते हैं – जयन्ती मंगला, काली, भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा धात्री, स्वाहा और स्वधा इन नामों
महर्षि मार्कण्डेयजी बोले – हे पितामह! संसार में जो गुप्त हो और जो मनुष्यों की सब प्रकार से रक्षा करता