श्री ललिता त्रिशती

ऊँ ककार रूपा कल्याणी कल्याण गुण शालिनी। कल्याण शैलनिलया कमनीया कलावती।।1।। कमलाक्षी कल्मषघ्नी करुणामृतसागरा। कदम्ब कानन आवासा कदम्बकुसुमप्रिया।।2।। कंदर्पविद्या कंदर्प

Continue reading

अथ कीलक स्तोत्रम्

महर्षि श्री मार्कडेयजी बोले – निर्मल ज्ञानरूपी शरीर धारण करने वाले, देवत्रयी रूप दिव्य तीन नेत्र वाले, जो कल्याण प्राप्ति

Continue reading

अथ अर्गला स्तोत्रम्

नमश्चण्डिकायै नम: मार्कण्डेयजी कहते हैं – जयन्ती मंगला, काली, भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा धात्री, स्वाहा और स्वधा इन नामों

Continue reading

error: Content is protected !!