शनैश्चर स्तवराज स्तोत्र

“भविष्य पुराण” में शनैश्चर स्तवराज स्तोत्र का उल्लेख किया गया है. जो भी व्यक्ति अथवा साधक इस स्तोत्र का नियमित

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श्रीकनकधारास्तोत्रम् – Kanakdhara Stotram – 22 Slokas in Praise of Goddess Lakshmi

अंगं हरे: पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम् अंगीकृताखिलविभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया: ।।1।।   मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारे: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि । माला

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श्रीगणेशपंचरत्नस्तोत्रम्

  मुदा करात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंकसकं विलासिलोकरंजकम् अनायकैकनायकं नमामि तं विनायम् नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायम्   नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम्

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