श्री तुलसी चालीसा और आरती
श्री तुलसी चालीसा ।।दोहा।। श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय । जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय ।।
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श्री तुलसी चालीसा ।।दोहा।। श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय । जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय ।।
।।दोहा।। श्री गुरु चरण चितलाय के धरें ध्यान हनुमान । बालाजी चालीसा लिखे “ओम” स्नेही कल्याण ।। विश्व विदित वर
।।दोहा।।i बंदहुं वीणा वादिनी, धरि गणपति को ध्याना । महाशक्ति राधा सहित, कृष्ण करौ कल्याण ।। सुमिरन करि सब देवगण,
।।दोहा।। जय-जय माता शीतला, तुमहिं धरै जो ध्यान । होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धि बलज्ञान ।। घट-घट वासी शीतला,
श्री खाटू श्याम चालीसा ।।दोहा।। श्री गुरु चरण ध्यान धर, सुमिरि सच्चिदानन्द । श्याम चालीसा भणत हूं, रच चौपाई छंद
।।दोहा।। शक्ति पीठ माँ ज्वालपा धरूं तुम्हारा ध्यान । हृदय से सिमरन करूं दो भक्ति वरदान ।। सुख वैभव सब