बृहस्पति देव की आरती
जय वृहस्पति देवा, ऊँ जय वृहस्पति देवा. छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा.. तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी. जगतपिता
Astrology, Mantra and Dharma
जय वृहस्पति देवा, ऊँ जय वृहस्पति देवा. छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा.. तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी. जगतपिता
आरती श्री नवग्रहों की कीजै. बाध, कष्ट, रोग, हर लीजै.. सूर्य तेज़ व्यापे जीवन भर. जाकी कृपा कबहुत नहिं छीजै..
ॐ जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता. अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता.. ॐ जय… सुंदर चीर सुनहरी,
ॐ जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता. अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता.. ॐ जय… सुंदर चीर सुनहरी,
पीताम्बर: पीतवपु: किरीटी, चतुर्भुजो देवगुरु: प्रशान्त: । दधाति दण्डं च कमण्डलुं च, तथाक्षसूत्रं वरदोsस्तु मह्यम ।।1।। नम: सुरेन्द्रवन्द्याय देवाचार्याय ते
पीताम्बर: पीतवपु: किरीटी, चतुर्भुजो देवगुरु: प्रशान्त: । दधाति दण्डं च कमण्डलुं च, तथाक्षसूत्रं वरदोsस्तु मह्यम ।।1।। नम: सुरेन्द्रवन्द्याय देवाचार्याय