ज्योतिष और फर्टिलिटी

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जानिए संतान प्राप्ति और फर्टिलिटी से जुड़े मुख्य ग्रह योग 

जन्म कुंडली के अंदर संतान प्राप्ति के लिए कुछ पहलुओं को देखा जाता है। पंचम भाव और पंचमेश मुख्य बिन्दु है लेकिन एक अच्छा स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ संतान दे सकता है तब स्वास्थ्य की दृष्टि से एक मजबूत लग्न होना भी जरूरी है। गुरु को संतान का कारक ग्रह माना गया है इसलिए गुरु की स्थिति और गुरु से पंचम भाव की स्थिति भी देखना चाहिए। इसके साथ ही शुक्र की स्थिति भी मजबूत होना जरूरी है क्योंकि इस ग्रह को वीर्य से जोड़ा गया है और प्रजजन से जोड़ा गया है। स्त्री और पुरुष दोनों की कुंडली में इसकी स्थिति देखना जरूरी है। 

चंद्रमा मन है और शरीर के भीतर जो भी तरल चीजें है वो चंद्रमा के अंतर्गत आती हैं। चंद्रमा से माहवारी (Menstrual cycle) को भी देखा जाता है। इस प्रकार एक मजबूत फर्टिलिटी देखने के लिए लग्न, पंचम भाव, पंचमेश, गुरु, शुक्र और चंद्रमा की स्थिति महत्व रखती है। इन पर जितना पाप ग्रहों का प्रभाव बढ़ता जाएगा उतना संतान सुख में कमी होती जाएगी। 

गुरु – जन्म कुंडली में गुरु किसी भी तरह से पीड़ित है तब देरी से संतान के योग बनते हैं या गर्भ ठहरने में परेशानी आती है। 

शुक्र – जन्म कुंडली में शुक्र पीड़ित है तब प्रजनन क्षमता में कमजोरी की वजह से संतान सुख में बाधा आती है। 

चंद्रमा – कुंडली में चंद्रमा कमजोर होने से भावनात्मक रूप से व्यक्ति कमजोर होता है और इस कारण भी संतान सुख में रुकावट होती हैं और चंद्रमा के कमजोर होने से महिलाओं में माहवारी चक्र प्रभावित होता है, जिससे संतान सुख में कमी आती है। 

पंचम भाव और पंचमेश – पंचम भाव और पंचमेश किसी भी तरह से 6,8,12 भाव के स्वामी से संबंध बनाते है तब भी संतान सुख में बाधा आती है। शनि, राहू, केतु से संबंध बनता है तब भी संतान सुख में बाधा उत्पन्न हो जाती है।  

राहू/केतु के प्रभाव की वजह से अगर संतान सुख में कोई रुकावट हो रही है तब ये पूर्व जन्म के कर्मों का परिणाम भी हो सकता है अर्थात पूर्व जन्म के पाप-पुण्य के आधार पर संतान सुख होगा। शनि की वजह से अगर बाधा हैं तो कुछ गूढ़ अर्थात जन्म-जन्म के कुछ कर्म या फिर कोई जटिल शारीरिक समस्या की वजह से रुकावट हो सकती है।                                            

डी – 7 अथवा सप्तमांश कुंडली – डी-7 कुंडली का लग्न, लग्नेश की स्थिति देखना है और फिर पंचम, पंचमेश की स्थिति देखना है और जन्म कुंडली के पंचमेश की डी-7 में क्या स्थिति है? यह चेक करना भी जरूरी है।   

उपरोक्त सभी पहलुओं को महिला और पुरुष दोनों की कुंडली में देखना है फिर दशा /अंतर्दशा और गोचर के अनुसार फलकथन किया जा सकता है। 

उपाय – जिस ग्रह की वजह से रुकावट आ रही है उसका उपाय करने से लाभ मिल सकता है। इसके अलावा संतान सुख के लिए प्रतिदिन हरिवंश पुराण का एक अध्याय पढ़ना चाहिए। संतान सुख होने तक यह पढ़ना चाहिए।