अंको के मध्य तालमेल

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अनादिकाल से मानव गूढ़ विद्याओं के बारे में ज्ञान हासिल करता आ रहा है. ना जाने कितनी ही विद्याएँ हैं जिनके बारे में अभी भी कुछ भेद छिपे हैं और जितना इन्हें जानने की कोशिश की जाती है उतना ही व्यक्ति और गहरे जाता रहता है. बहुत सी गूढ़ विद्याएँ लुप्त भी होती जा रही हैं. कुछेक जो बची हैं जिनमें ज्योतिष, हस्तरेखा और अंकशास्त्र अभी प्रमुख हैं. विद्या कोई भी हो सभी में नौ ग्रहो की भूमिका प्रमुख मानी जाती है. इन ग्रहो का मनुष्य जीवन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है. आज इस लेख के माध्यम से हम आपको अंकशास्त्र के अंकों के बारे में बात करेगें कि कैसे अंक एक-दूसरे के मित्र होते हैं और कौन से शत्रु होते हैं.


अंकशास्त्र में मुख्य रुप से 1 से 9 तक के अंको की बात की जाती है. व्यक्ति विशेष की जन्म तारीख का जो भी कुल जोड़ आता है वह उसका भाग्यांक या टेलेन्ट नंबर बन जाता है. इसी प्रकार नाम की स्पैलिंग में जो हिज्जे आते हैं उन सभी को एक अंक मिला हुआ है. सभी हिज्जो का जो भी कुल जोड़ होता है वह नामांक बन जाता है. आजकल हम सभी देख रहे हैं कि बहुत से लोग अपने नाम की स्पैलिंग में कुछ अतिरिक्त हिज्जे जोड़ देते हैं या उनमें से कुछ काट देते हैं. ऎसा क्यूँ होता है? कभी सोचा है? जब व्यक्ति जन्म लेता है तब अपनी जन्म तारीख तो वह बदल नही सकता है लेकिन अपने नाम नंबर को अपने जन्म नंबर के साथ मैच जरुर कर सकता है.


बहुत बार व्यक्ति को काम में बाधाओ का सामना करना पड़ता है. घर में भी पारीवारिक स्थिति अच्छी नही होती है. बहुत बार व्यक्ति जिस शहर में नौकरी कर रहा होता है वह उसके लिए प्रतिकूल हो जाता है. जिस कम्पनी में काम करता है या जिस व्यक्ति के साथ बिजनेस करता है वह प्रतिकूल फल प्रदान करते हैं. इन सभी प्रकार की समस्याओ का समाधान अंकशास्त्र के माध्यम से किया जा सकता है. अंको को मुख्यत: तीन भागों में बांटा जाता है. जो निम्नलिखित हैं :-


1) 1,2,4,7 अंको का एक समूह माना गया है.
2) 3,6,9 अंको का दूसरा समूह माना गया है.
3) 5 और 8 अंक तीसरे समूह में आते हैं.

 

अब उपरोक्त तालिका के आधार पर समूह एक और दूसरे की आपस में नहीं बनती है लेकिन 5 और 8 की दोनों समूहों से बन जाती है. आप इस आधार पर भी अपना मैच कर सकते हैं. दूसरा तरीका एक यह है कि आपके नाम अंक और आपके जन्म अंको के मध्य कितने अंको का अंतर है. यदि नाम अंक और जन्म अंक एक ही संख्या है तब यह अनुकूल परिस्थिति मानी गई है. अगर दोनो के बीच एक अंक का अंतर है तब व्यक्ति को जीवन में कम प्रयास से ही प्राप्तियाँ हो जाएगी. अगर दो अंको का अंतर है तब व्यक्ति को बिना प्रयास के कुछ नहीं मिलता है लेकिन बहुत ज्यादा नही करने पड़ते हैं. यदि दोनो अंको के बीच 3 अंको का अंतर है तब यह सबसे खराब माना गया है. व्यक्ति को जीवन भर संघर्षौ के बिना कुछ नहीं मिल पाता है. यदि यह अंतर 4 अंको का है तब इसे शुभ माना जाता है. थोड़े से प्रयास से बहुत सी चीजें मिल जाती है और यदि अंतर 5, 6 या इससे ज्यादा होता है तब यह ना तो 1 और 2 जैसा अच्छा होता है और ना ही 3 जैसे खराब होता है. बस इनका जीवन सामान्य रुप से चलता रहता है.
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