गोस्वामी तुलसीदास लिखित – श्रीहनुमान स्तुति

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मंगल – मूरति मारुत – नंदन ।

सकल – अमंगल – मूल – निकंदन ।।

पवनतनय संतन – हितकारी ।।

हदय बिराजत अवध – बिहारी ।।

मातु – पिता, गुरु, गनपति, सारद ।।

सिवा -समेत संभु, सुक, नारद ।।

चरन बंदि बिनवौं सब काहू ।।

देहु रामपद- नेह – निबाहू ।।

बंदौं राम – लखन – बैदेही ।।

जे तुलसीकेपरम सनेही ।।

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