महाभागवत – देवी पुराण – उन्नासीवाँ अध्याय 

श्रीनारदजी बोले – परमेश्वर ! महान पातकों का नाश करने वाले योनिपीठ तीर्थ का माहात्म्य आप के मुखकमल से मैंने

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