महाभागवत – देवी पुराण – छिहत्तरवाँ अध्याय 

श्रीनारदजी बोले – प्रभो ! देव ! जगन्नाथ ! आपके मुखकमल से भगवती गङ्गा के अतुलनीय माहात्म्य को सुनकर मैं

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