कार्तिक माह महात्म्य – इक्कीसवाँ अध्याय

लिखने लगा हूँ श्रीहरि के, चरणों में शीश नवाय। कार्तिक माहात्म का बने, यह इक्कीसवाँ अध्याय।। अब ब्रह्मा आदि देवता

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