गरुड़ पुराण – बारहवाँ अध्याय

एकादशाहकृत्य-निरुपण, मृत-शय्यादान, गोदान, घटदान, अष्टमहादान, वृषोत्सर्ग, मध्यमषोडशी, उत्तमषोडशी एवं नारायणबलि   गरुड़ उवाच गरुड़जी ने कहा – हे सुरेश्वर !

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