अथ कीलक स्तोत्रम्

महर्षि श्री मार्कडेयजी बोले – निर्मल ज्ञानरूपी शरीर धारण करने वाले, देवत्रयी रूप दिव्य तीन नेत्र वाले, जो कल्याण प्राप्ति के हेतु है तथा अपने मस्तक पर अर्द्धचन्द्र धारण करने वाले हैं उन भगवान शंकर को नमस्कार है, जो मनुष्य इन कीलक मन्त्रों को जानता है, वही पुरुष कल्याण को प्राप्त करता है, जो अन्य…