दस महाविद्या – षोडशी
षोडशी माहेश्वरी शक्ति की सबसे मनोहर श्रीविग्रहवाली सिद्ध देवी हैं. महाविद्याओं में इनका चौथा स्थान है। सोलह अक्षरों के मन्त्रवाली
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षोडशी माहेश्वरी शक्ति की सबसे मनोहर श्रीविग्रहवाली सिद्ध देवी हैं. महाविद्याओं में इनका चौथा स्थान है। सोलह अक्षरों के मन्त्रवाली
गरुड़ उवाच – Garuda Uvach गरुड़ जी ने कहा – हे केशव ! यमलोक का मार्ग किस प्रकार दु:खदायी होता
भगवती छिन्नमस्तिका का स्वरुप अत्यन्त ही गोपनीय है, इसे कोई साधक ही जान सकता है. दशमहाविद्याओं में इनका तीसरा स्थान
भगवती काली को ही नीलरुपा होने के कारण तारा भी कहा गया है. वचनान्तर से तारा नाम का रहस्य यह
प्राचीन समय में प्रियव्रत नाम के एक बहुत प्रसिद्ध राजा हुए, इनके पिता का नाम स्वायम्भुव मनु था. प्रियव्रत योगीराज
दस महाविद्याओं में काली का प्रथम स्थान है. महाभागवत के अनुसार महाकाली ही मुख्य हैं और उनके उग्र तथा सौम्य