
शिवपुराण, लिंगपुराण तथा स्कन्द पुराण आदि में रुद्राक्ष के महत्व और माहात्म्य का विशेषरूप से उल्लेख किया गया है। रुद्राक्ष को साक्षात शिव स्वरूप माना गया है। रुद्राक्ष के दर्शन, स्पर्श तथा उस पर जप करने से इसे समस्त पापों का हरण करने वाला माना गया है। भोग और मोक्ष की इच्छा रखने वाले चारों वर्णों के लोगों और खासकर शिवभक्तों को शिव-पार्वती की कृपा व प्रसन्नता पाने के लिए रुद्राक्ष को अवश्य धारण करना चाहिए।
रुद्राक्ष धारण करने के शुभ दिन
रुद्राक्ष धारण करने के लिए मेष संक्रांति, पूर्णिमा, अक्षय तृतीया, दीपावली, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, शिवरात्रि के दिन, विजयादशमी (दशहरा), अयन परिवर्तन काल, ग्रहणकाल, गुरुपुष्य योग, रविपुष्य योग, द्विपुष्कर योग, त्रिपुष्कर योग आदि शुभ योगों में रुद्राक्ष धारण करने से सम्पूर्ण पापों की निवृत्ति होती है।
शास्त्रों में एकमुखी रुद्राक्ष से लेकर चौदह मुखी रुद्राक्ष तक का वर्णन किया गया है। इन सभी रुद्राक्षों को उपरोक्त दिए शुभ मुहूर्त्त में और नीचे लिखे मंत्रों के जाप के साथ धारण करना चाहिए।
रुद्राक्ष धारण करने का मंत्र
एक मुखी रुद्राक्ष – यह रुद्राक्ष साक्षात शिवस्वरूप है और ब्रह्म हत्या जैसे पापों को भी दूर करता है। इस रुद्राक्ष को “ऊँ ह्रीं नमः” मंत्र के उच्चारण के साथ धारण करना चाहिए।
दो मुखी रुद्राक्ष – यह रुद्राक्ष देवी-देवता स्वरूप माना गया है और सभी तरह के पापों को दूर करता है। यह अर्द्धनारीश्वर स्वरूप है और इसे धारण करने से अर्द्धनारीश्वर प्रसन्न होते हैं। “ॐ नमः” इस मंत्र के उच्चारण के साथ इस रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए।
तीन मुखी रुद्राक्ष – यह रुद्राक्ष अग्निरूप है और नारी हत्या पाप को दूर करता है। इस रुद्राक्ष के पहनने से तेज और शौर्य में वृद्धि होती है, साथ ही ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। “ॐ क्लीं नमः” इस मंत्र के उच्चारण के साथ इस रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए।
चतुर्मुखी रुद्राक्ष – यह रुद्राक्ष साक्षात ब्रह्मा जी का स्वरूप है। इस रुद्राक्ष के स्पर्श, दर्शन मात्र से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। इसे धारण करने से संतति की प्राप्ति होती है। इस रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र “ॐ ह्रीं नमः” है।
पंचमुखी रुद्राक्ष – यह रुद्राक्ष पंचदेवों (शिव, विष्णु, गणेश, सूर्य और देवी) का स्वरूप माना गया है। इसके धारण करने से नर हत्या के पाप से प्राणी मुक्त हो जाता है। यह रुद्राक्ष कालाग्नि रुद्र स्वरूप भी है। यह अभक्ष्य-भक्षण और आगम्य-गमन पापों को दूर करता है। इस रुद्राक्ष को मोक्ष प्रदान करने वाला भी माना गया है। इस रुद्राक्ष को धारण करने का मंत्र “ॐ ह्रीं नमः” है।
छः मुखी रुद्राक्ष – यह साक्षात स्वामी कार्तिकेय स्वरूप माना गया है तथा दक्षिणकर में धारणीय माना गया है। इसे धारण करने से ब्रह्महत्यादि पाप दूर होते हैं। इसके धारण करने से श्री एवं आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसे धारण करने का मंत्र भी “ॐ ह्रीं नमः” है।
सप्तमुखी रुद्राक्ष – यह रुद्राक्ष अनंग नाम वाला और साक्षात कामदेव स्वरूप माना गया है। यह अत्यंत भाग्यशाली बनाता है और स्वर्ण चोरी के पाप को नष्ट करता है। इसे धारण करने का मंत्र “ॐ हुं नमः” है।
अष्टमुखी रुद्राक्ष – इस रुद्राक्ष को साक्षात साक्षी विनायक देव माना गया है। इसे धारण करने से पंचपातकों का विनाश होता है। इसे धारण करने का मंत्र “ॐ हुं नमः” है और इस मंत्र से धारण करने से परमपद की प्राप्ति होती है।
नवमुखी रुद्राक्ष – इस रुद्राक्ष को भैरव तथा कपिल मुनि का प्रतीक माना गया है। मतांतर से इस रुद्राक्ष को नौ रूप धारण करने वाली महेश्वरी दुर्गा उसकी अधिष्ठात्री देवि मानी गयी हैं। जो मनुष्य भक्तिपरायण होकर अपने बाएं हाथ व भुजा में इस रुद्राक्ष को धारण करता है, उसके ऊपर नवशक्तियों की कृपादृष्टि बनी रहती है और वह शिवजी के समान बली होगा। इसे धारण करने का मंत्र “ॐ ह्रीं हुं नमः” है।
दशमुखी रुद्राक्ष – यह रुद्राक्ष साक्षात भगवान जनार्दन माने गए हैं। इस रुद्राक्ष के धारण करने से ग्रह, पिशाच, बेताल, ब्रह्मराक्षस और नागादि का भय दूर हो जाता है। इसे धारण करने का मंत्र “ॐ ह्रीं नमः” है और इस मंत्र से धारण करने पर साधक की पूर्णायु होती है और वह शांति प्राप्त करता है।
ग्यारह (एकादश) मुखी रुद्राक्ष – यह साक्षात एकादश स्वरूप है और इसे शिखा पर धारण करने से पुण्यफल, सहस्त्र यज्ञों के फल के समान इसका फल माना गया है। इस रुद्राक्ष को “ॐ ह्रीं हुं नमः” मंत्र से धारण करना है। इसे धारण करने के पश्चात व्यक्ति साक्षात रुद्रस्वरूप होकर सर्वत्र विजयी होता है।
बारह (द्वादश) मुखी रुद्राक्ष – यह रुद्राक्ष साक्षात महाविष्णु का स्वरूप है। इसे धारण करके व्यक्ति साक्षात विष्णु को ही धारण करता है। इस रुद्राक्ष को कान में धारण करने से द्वादश आदित्य भी प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति अश्वमेघादि को प्राप्त होता है। इसे द्वादश आदित्य स्वरूप भी माना जाता है। इसे धारण करने का मंत्र “ॐ क्रौं क्षौं रौं नमः” है।
तेरह मुखी रुद्राक्ष – इस रुद्राक्ष को कामदेव स्वरूप माना गया है। यह समस्त कामनाओं की सिद्धि कराने में समर्थ है तथा इसे धारण करने पर सभी प्रकार के भोगों की प्राप्ति होती है। इसे धारण करने का मंत्र “ॐ ह्रीं हुं नमः” है।
चौदह मुखी रुद्राक्ष – यह रुद्राक्ष रुद्र (शिव) की अक्षि (आँसू) से उत्पन्न हुआ इसलिए यह भगवान का नेत्र स्वरूप है। इसे धारण करने का मंत्र “ॐ नमः” है और इस मंत्र से धारण करने पर व्यक्ति स्वयं भी शिव रूप हो जाता है, सभी व्याधियों का हरण करके परमगति को पाता है।
