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मांगलिक योग और निवारण

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मांगलिक योग को लेकर बहुत सी भ्राँतियाँ समाज में ज्योतिषियों द्वारा फैलाई जा रही है या यूँ कहिए कि सोशल मीडिया पर आधी-अधूरी जानकारी मांगलिक योग को लेकर भी दी जा रही है या फिर कोई व्यक्ति मांगलिक योग को लेकर कुछ लिखता भी है तो उसकी जाँच परख करने की बजाय दूसरा व्यक्ति उसे ज्यों का त्यों अपनी साईट अथवा ब्लॉग आदि पर चिपका देता है. इस योग की सत्यता या इस योग की गहराई तक बहुत कम ही लोग पहुंच पाते हैं.

“मंगल” शब्द का उपयोग मांगलिक कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है जैसे सब कुशल-मंगल है ना! आदि. इसके अलावा मंगल गीत आदि शब्द भी सुनने में आते हैं तब मांगलिक योग बुरा कैसे हो सकता है? वास्तव में मंगल को ऊर्जा से भरा हुआ ग्रह माना गया है और ग्रहों में इसे सेनापति का दर्जा दिया गया है. अब सेनापति का काम लड़ाई-झगड़े का अधिक रहता है तो मंगल का काम लड़ाई-झगड़ा और ऊर्जा से भरा तथा साहसी होना है. जिन दो व्यक्तियों का परस्पर विवाह होना है तो उनमें से एक अगर मांगलिक है तो वह गैर मांगलिक वाले से अधिक ऊर्जावान होगा जिससे दोनों की ऊर्जा का स्तर भिन्न होगा. अब ऊर्जा का स्तर ही एक समान नहीं होगा तो जीवन की गाड़ी चलेगी कैसे!

 

मांगलिक योग का निर्माण – Formation Of Manglik Yog

जन्म कुंडली में यदि लग्न (Ascendant), चतुर्थ(4th House), सप्तम(7th House), अष्टम(8th House) अथवा द्वादश भाव(12th House) में मंगल(Mars) स्थित है तब इसे मांगलिक योग की कुंडली माना जाता है लेकिन दक्षिण भारत में इन भावों के साथ दूसरे भाव के मंगल को भी मांगलिक योग में शामिल किया गया है. अब कुंडली के 12 में छ्: भावों में मंगल की स्थिति से मांगलिक योग बनता है तो आधी से ज्यादा लोगों की कुंडली मांगलिक योग की बन जाएगी.

इस पर भी कुछ महान विद्वान चंद्रमा से भी मंगल योग देख लेते हैं अर्थात चंद्रमा से पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल है तो व्यक्ति चंद्र मंगली हो गया. इसके अलावा शुक्र मंगलिक का भी कुछ विचार कर लेते हैं अर्थात उपरोक्त भावों में शुक्र से मंगल की स्थिति शुक्र मंगलिक कहलाती है. इस प्रकार लग्न से, चंद्र से तथा शुक्र से भी कई स्थानों पर मंगल योग का शुभाशुभ विचार किया जाता है. अगर कोई व्यक्ति लग्न के साथ चंद्र कुंडली से भी मांगलिक है तो वह डबल मांगलिक कहलाता है, अगर शुक्र कुंडली से भी मांगलिक है तो ट्रिपल मांगलिक कहलाएगा. शुक्र सातवें भाव का कारक ग्रह है इसलिए उसे से भी मांगलिक योग देखा जाता है.

चंद्र तथा शुक्र को ज्यादा महत्व देने की बजाय केवल लग्न से बनने वाले मांगलिक योग को देखना चाहिए.

 

माँगलिक योग कुंडली का मिलान – Matching Terms For Manglik Kundali

यदि किसी जातक की कुंडली में लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल है तो जिस दूसरे साथी से उसका विवाह तय होना है तब उसका मंगल भी वहीं स्थित होना चाहिए जहाँ पहले वाले जातक का है. माना कि लड़के की कुंडली में बारहवें भाव में मंगल स्थित है तो लड़की की कुंडली में भी बारहवें भाव में ही मंगल स्थित होना चाहिए तभी ये उचित मिलान कहा जाएगा अन्यथा नहीं. अधिकाँशत: ज्योतिषी ऎसा नहीं करते है, वे केवल ये देखते हैं कि दोनों मांगलिक है या नहीं और विवाह के लिए हामी भर देते हैं. ऎसे में वर तथा वधू का ऊर्जा स्तर समान नहीं रह पाएगा.

यदि कोई व्यक्ति मांगलिक है और उसकी कुंडली में जिस भाव में मंगल स्थित है ठीक उसी भाव में उसके साथी की कुंडली में कोई पाप ग्रह जैसे राहु, शनि, केतु अथवा सूर्य स्थित है तब भी विवाह किया जा सकता है क्योंकि पाप ग्रह से मंगल की ऊर्जा कम हो जाती है. सूर्य को पाप ग्रह नहीं कहा जाता लेकिन इसे उग्र ग्रह की श्रेणी में रखा जाता है. इस योग को उदाहरण से समझेगें – माना लड़की की कुंडली में सातवें भाव में मंगल स्थित है और लड़के की कुंडली के उसी सातवें भाव में कोई पाप ग्रह(शनि, राहु, केतु अथवा उग्र ग्रह सूर्य) स्थित है तब विवाह किया जा सकता है.

 

मांगलिक योग का प्रभाव – Impact Of Manglik Yog

कई लोगों का यह भी विचार था कि व्यक्ति जब 28 वर्ष का हो जाता है तब मांगलिक योग खतम हो जाता है लेकिन ऎसा नहीं होता. जो योग कुंडली में है वह अपने फल देता ही है. इस बात के पीछे एक तथ्य यह हो सकता है कि पुराने समय में व्यक्ति का विवाह बाल अवस्था में हो जाता था. बचपन, किशोरावस्था तथा जवानी में व्यक्ति के भीतर अत्यधिक जोश भरा रहता है और उस पर मंगल का प्रभाव हो जाए तो व्यक्ति का क्रोध भी बढ़ जाता है, व्यक्ति साहसी, ऊर्जावान तथा अत्यधिक बलशाली हो जाता है. बात-बात पर बल का प्रयोग करने से घर की सुख शांति भंग हो जाती है. लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है और जिम्मेदारियाँ बढ़ती जाती है तो मंगल का प्रभाव स्वत: कम होता जाता है.

वर्तमान समय में तो विवाह देरी से ही होता है तो 28 वर्ष को अपवाद ही माना जाना चाहिए.

 

मांगलिक योग का परिहार अथवा भंग होना – Cancellation Of Manglik Yog 

जातक की जन्म कुंडली के कुछ ग्रह योग ऎसे भी होते हैं जिनके कुंडली में बनने से मांगलिक योग कैंसिल अथवा भंग हो जाता है.

मांगलिक प्रभाव को कम करने के उपाय – Remedies For Manglik Yog

यदि किसी व्यक्ति को मांगलिक योग से परेशानी हो रही है अथवा विवाह से पूर्व मांगलिक योग का कोई उपाय करना चाहता है तो वह निम्न उपाय कर सकता है :-

मंगल दोष के मामले में सबसे ज्यादा ध्यान व्यक्ति को अपने स्वभाव पर देना चाहिए क्योंकि मंगल व्यक्ति को झगड़ालू और उत्तेजित बनाता है, शारीरिक संबंधों में भी उत्तेजना देता है इसलिए अपने स्वभाव में नरमी लाना बहुत जरुरी है.

 

मंगल के मंत्र – Mantra For Mars

मांगलिक योग के प्रभाव को कम करने के लिए नियमित रुप से एक माला निम्न मंत्र की करनी चाहिए :-

ऊँ अं अंगारकाय नम:

अथवा

ऊँ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:

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