Site icon Astroprabha

राहु/केतु का भावों के अनुसार आत्म-पाठ फल

Advertisements

प्रथम भाव (लग्न) – अहं से आत्मा तक

द्वितीय भाव – मूल्य और वाणी

तृतीय भाव – साहस और प्रयास

चतुर्थ भाव – आंतरिक शांति

पंचम भाव – बुद्धि और पूर्व पुण्य

षष्ठ भाव – ऋण और सेवा

सप्तम भाव – संबंध और प्रतिबिंब

अष्टम भाव – परिवर्तन और रहस्य

नवम भाव – धर्म और मार्ग

दशम भाव – कर्म और उत्तरदायित्व

एकादश भाव – इच्छा और लाभ

द्वादश भाव – विसर्जन और मोक्ष

 

निष्कर्ष – 

केतु बताता है – तुम क्या बन चुके हो।
राहु बताता है – तुम्हें क्या बनना है।
और इन दोनों के संतुलन से आत्म-यात्रा पूर्ण होती है। 

अथवा 

केतु अतीत का अनुभव है,
राहु वर्तमान का प्रशिक्षण
दोनों को समझ लेने पर आत्मा जन्म-मरण के चक्र से ऊपर उठती है।

Exit mobile version