Site icon Astroprabha

मृगशिरा नक्षत्र का उपचार

Advertisements

अगर मृगशिरा नक्षत्र पाप अथवा अशुभ प्रभाव में होकर परेशानी, बाधा अथवा कष्ट उत्पन्न कर रहा हो तब माँ पार्वती के लिए पूजा पाठ करना चाहिए क्योंकि ऎसा करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है और हर तरफ मंगल होता है. मार्गशीर्ष महीने में मृगशिरा नक्षत्र में चंद्रमा के होने पर अगर माता पार्वती की पूजा की जाए तब अवश्य ही विशेष कृपा माता की जातक पर होती है. अगर यह नक्षत्र पीड़ित नहीं भी है तब भी माता पार्वती का पूजन व्यक्ति को शुभ फल प्रदान करता है.

अगर रँगों की बात की जाए तो गुलाबी, लाल, सफेद, हरा अथवा हल्के रँग के वस्त्र धारण कर के भी इस नक्षत्र के शुभ फलों को बढ़ाया जा सकता है. इस नक्षत्र के देवता चंद्रमा की पूजा आराधना कर के भी इस नक्षत्र के अनिष्ट प्रभाव को दूर किया जा सकता है. चंद्रदेव की आराधना में चंदन, धूप, पुष्प और शुद्ध घी के दीपक का उपयोग किया जाना चाहिए. जिस दिन मृगशिरा नक्षत्र पड़ता हो उस दिन दही और चावल का दान करने से भी इस नक्षत्र के बुरे प्रभाव को कम किया जा सकता है.

इस नक्षत्र के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए “जयंती” की जड़ को सुखाकर ताबीज के रुप में धारण करने से भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है. मृगशिरा नक्षत्र के शुभ फलों को बढ़ाने के लिए इस नक्षत्र के वैदिक मंत्र का जाप रोज 108 बार करने से भी बुरे प्रभाव को दूर किया जा सकता है. यदि अत्यधिक प्रभावशाली फल प्राप्त करने हैं तब दूध व दही को मिलाकर होम करते हुए इस वैदिक मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए, मंत्र है :-

इमम्देवा असपत्न गूं सुबध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठयाय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय ।

इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विषएषवोsमी राजासोमोस्माकं ब्राह्मणानागूं राजा चन्द्रमसे नम: ।।

 

आर्द्रा नक्षत्र के उपचार अथवा उपायों के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें :- 

https://chanderprabha.com/2019/06/09/ardra-nakshatra-remedies/

Exit mobile version