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अश्विनी नक्षत्र का उपचार

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जन्म कुंडली में कई बार जन्म नक्षत्र पाप प्रभाव में होता है अथवा गोचर में भी पाप अथवा अशुभ प्रभाव में हो जाता है. जन्म नक्षत्र के अतिरिक्त जन्म कुण्डली के किसी भी अशुभ अथवा पाप ग्रह का अश्विनी नक्षत्र से संबंध बनने पर कष्ट हो सकता है, पीड़ा होती है, हानि अथवा कार्य बाधा अथवा अपयश की प्राप्ति जातक को हो सकती है. यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि अश्विनी नक्षत्र पाप प्रभाव में है तब ऎसे में गणेश जी की पूजा करने से लाभ मिलता है.

“ऊँ गं गणपतये नम:” मंत्र की तीन माला का जाप प्रतिदिन करने से हर प्रकार की बाधा दूर होती हैं. अश्विनी माह अथवा अश्विनी नक्षत्र में जब चंद्रमा गोचर करता है तब “ऊँ ऎं” और “ऊँ इम्” का जाप 108 बार करने से भी सभी परेशानियाँ दूर होती हैं. यह जाप व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है. अश्विनी नक्षत्र के शुभ बल को भी इन मंत्र जाप के द्वारा बढ़ाकर जातक अपने मान-सम्मान में वृद्धि कर सकता है, धन, प्रतिष्ठा तथा ओज में भी वृद्धि कर सकता है.

जिन व्यक्तियों को अश्विनी नक्षत्र के वैदिक मंत्र में रुचि हैं वह इस नक्षत्र के वैदिक मंत्र् का जाप कर सकते हैं जो इस प्रकार से है –

“ऊँ अश्विना तेजसा चक्षु प्राणेन सरस्वती वीर्यम्।

वाचेन्द्रो बले नेन्द्रायद द्युरिन्द्रयम ।।”

 

भरणी नक्षत्र के उपचार अथवा उपायों के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें :-

https://chanderprabha.com/2019/06/06/bharani-nakshatra-remedy/

 

 

 

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