Site icon Astroprabha

बृहत् पराशर होरा शास्त्र – अथाशुभजन्मकथनाध्याय: 

Advertisements

बृहत् पराशर होरा शास्त्र के इस 88वें अध्याय में महर्षि पराशर ने शुभ लग्न, शुभ ग्रह योगों के साथ-साथ वक्ष्यमाण कारणों से पाने वाले अशुभ फलों के बारे में  बताया है, आइए जानें।   

 

पराशर बोले – श्लोक 1,2,3,4,5  का अर्थ 

शुभ लग्न व शुभ योगों में उत्पन्न होने पर भी जातक वक्ष्यमाण कारणों से अशुभ फल पाता है, अर्थात ये अशुभ जन्म समझने उपयुक्त हैं। 

1) अमावस्या 

2) कृष्ण चतुर्दशी 

3) भद्रा करण 

4) भाई या पिता का एक नक्षत्र 

5) संक्रान्ति 

6) क्रांतिसाम्य या महापात 

7) सूर्यग्रहण 

8) चन्द्रग्रहण 

9) व्यतिपातादि दुर्योग 

10) त्रिविध गण्डान्त 

11) यमघण्ट योग 

12) तिथिक्षय 

13) दग्धादि योग 

14) त्रिखल जन्म/त्रीतर जन्म (इसका अर्थ है कि तीन लड़कियों के बाद पुत्र का जन्म या तीन लड़कों के बाद एक लड़की का जन्म होना)

15) विकृत या न्यूनाधिक समय प्रसव 

16) तुलामास 

17) सार्पशीर्ष 

उपरोक्त तिथियों अथवा योगों में जन्म होने से जातक कई प्रकार से कष्ट पाता है। पराशर होरा के अगले अध्यायों में इन कष्टों के निवारण के लिए पूजा विधि भी बताई गयीं हैं जिन्हें करने से कष्टों का निवारण अवश्य होता है।

Exit mobile version