प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रखे जाते हैं. सभी प्रदोष व्रत कल्याणकारी कहे गए हैं लेकिन कुछ खास प्रदोष व्रत करने से विशेष फल मिलते हैं, जैसे – शनि प्रदोष व्रत संतान की प्राप्ति के लिए माना गया है, भौम प्रदोष (मंगलवार को प्रदोष व्रत होने से यह भौम प्रदोष कहा जाता है) व्रत ऋण (Loans) दूर करने के लिए, सोम प्रदोष व्रत मन की शान्ति तथा सुरक्षा के लिए रखा जाता है.रवि प्रदोष व्रत, जिसे अर्क प्रदोष भी कहा जाता है, इसे आरोग्य प्राप्ति व आयु की वृद्धि के लिए कल्याणकारी माना गया है.
व्रत रखने वाले व्यक्ति को सूर्यास्त के समय दुबारा स्नान करके शिव का पूजन करके कथा करनी चाहिए. उसके बाद “भवाय भवनाशाय, महादेवाय धीमते । रूद्राय नीलकण्ठाय शर्वाय शशि मौलिने । उग्रायोग्राघनाशाय भीमाय भय हारिणे । ईशानाय नमस्तुभ्यं पशूनां पतये नम:।।” इस मंत्र से प्रार्थना करके भोजन करना चाहिए.
| दिनाँक (Dates) | दिन (Days) | हिन्दु माह (Hindu Month) |
| 11 जनवरी | शनिवार | पौष शुक्ल पक्ष |
| 27 जनवरी | सोमवार | माघ कृष्ण पक्ष -सोम प्रदोष |
| 10 फरवरी | सोमवार | माघ शुक्ल पक्ष – सोम प्रदोष |
| 25 फरवरी | मंगलवार | फाल्गुन कृष्ण पक्ष – भौम प्रदोष |
| 11 मार्च | मंगलवार | फाल्गुन शुक्ल पक्ष – भौम प्रदोष |
| 27 मार्च | बृहस्पतिवार | चैत्र कृष्ण पक्ष |
| 10 अप्रैल | बृहस्पतिवार | चैत्र शुक्ल पक्ष |
| 25 अप्रैल | शुक्रवार | वैशाख कृष्ण पक्ष |
| 9 मई | शुक्रवार | वैशाख शुक्ल पक्ष |
| 24 मई | शनिवार | ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष – शनि प्रदोष |
| 8 जून | रविवार | ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष |
| 23 जून | सोमवार | आषाढ़ कृष्ण पक्ष – सोम प्रदोष |
| 8 जुलाई | मंगलवार | आषाढ़ शुक्ल पक्ष – भौम प्रदोष |
| 22 जुलाई | मंगलवार | श्रावण कृष्ण पक्ष – भौम प्रदोष |
| 6 अगस्त | बुधवार | श्रावण शुक्ल पक्ष |
| 20 अगस्त | बुधवार | भाद्रपद कृष्ण पक्ष |
| 5 सितंबर | शुक्रवार | भाद्रपद शुक्ल पक्ष |
| 19 सितंबर | शुक्रवार | आश्विन कृष्ण पक्ष |
| 4 अक्तूबर | शनिवार | आश्विन शुक्ल पक्ष – शनि प्रदोष |
| 18 अक्तूबर | शनिवार | कार्तिक कृष्ण पक्ष – शनि प्रदोष |
| 3 नवंबर | सोमवार | कार्तिक शुक्ल पक्ष – सोम प्रदोष |
| 17 नवंबर | सोमवार | मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष – सोम प्रदोष |
| 2 दिसंबर | मंगलवार | मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष – भौम प्रदोष |
| 17 दिसंबर | बुधवार | पौष कृष्ण पक्ष |
