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जन्मकुंडली में भावानुसार वक्री ग्रहों का फल

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वैदिक ज्योतिष में वक्री ग्रह जिस भाव में स्थित होता है, उस भाव से संबंधित पूर्वजन्मीय कर्म अधूरे माने जाते हैं। उसी भाव के विषय जीवन में बार-बार सक्रिय होकर जातक को सुधार, अनुभव और परिपक्वता की ओर ले जाते हैं।

प्रथम भाव (लग्न) में वक्री ग्रह

द्वितीय भाव में वक्री ग्रह

तृतीय भाव में वक्री ग्रह

चतुर्थ भाव में वक्री ग्रह

पंचम भाव में वक्री ग्रह

षष्ठ भाव में वक्री ग्रह

सप्तम भाव में वक्री ग्रह

अष्टम भाव में वक्री ग्रह

नवम भाव में वक्री ग्रह

दशम भाव में वक्री ग्रह

एकादश भाव में वक्री ग्रह

द्वादश भाव में वक्री ग्रह

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