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पंच महापुरुष भंग योग 

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बृहत् पराशर होरा शास्त्र के अध्याय 77 {अथ पंचमहापुरुष लक्षणाध्याय:} में पंच महापुरुष योगों का वर्णन किया गया है। जिसमें मंगल से रुचक पंचमहापुरुष योग, बुध से भद्र, गुरु से हंस, शुक्र से मालव्य और शनि से शश नामक पंचमहापुरुष योग बनता है। जन्म कुंडली में केंद्र स्थान में यदि ये ग्रह स्वराशि में स्थित हैं या उच्च राशि में स्थित है तब पंचमहापुरुष योग बनता हैं और महर्षि पराशर जी ने कहा है कि इन योगों में जन्मे व्यक्ति महान अर्थात प्रतिष्ठित और प्रसिद्द होने के साथ अन्य सुखों को भी प्राप्त करते हैं। 

पंचमहापुरुष योग बनने के बाद बहुत-सी कुंडलियों में भंग भी हो जाते हैं यदि ये योग बनाने वाला ग्रह राहु, केतु, सूर्य अथवा चन्द्रमा के साथ हों या दृष्ट हों। पंचमहापुरुष योग में शामिल ग्रह स्वतंत्र रूप से केंद्र स्थान में ही योग बनाते हैं। पंचमहापुरुष योग बनाने वाला ग्रह 6, 8 या 12वें भाव के स्वामी से भी किसी भी तरह से संबंध बनाता है तब भी यह योग अपने पूर्ण फल नहीं देता है। इस आर्टिकल में हम इस योग के भंग होने के कारण और परिणाम समझेंगे और साथ ही क्या उपाय से हम इसमें कुछ सुधार कर सकते हैं, यह भी समझने का प्रयास करेगें। 

हम यह भी समझने का प्रयास करेंगे कि वर्तमान जीवन में कोई भी व्यक्ति पंचमहापुरुष योग के साथ क्यों जन्मा है और योग बन कर भी भंग हो गया है तो क्यों हो गया है !   

रुचक योग 

मंगल केंद्र के अंदर स्वराशि अथवा अपनी उच्च राशि (मेष, वृश्चिक अथवा मकर) में स्थित हो तब रुचक नामक पंचमहापुरुष योग बनता है और किसी भी व्यक्ति की कुंडली में इस योग के बनने का अर्थ यह है कि पूर्व जन्म में व्यक्ति ने अपने बहन-भाइयों को बहुत प्यार दिया है और उनकी बहुत अच्छी तरह से देखभाल की है। व्यक्ति भावनात्मक रूप से अपने बहन-भाइयों के साथ जुड़ा हुआ था। 

जन्म कुंडली में यदि रुचक योग बनकर भी भंग हो गया है तब इसका अर्थ है कि व्यक्ति ने पूर्व जन्म में अपने बहन-भाइयों के साथ बिलकुल भी अच्छा व्यवहार नहीं किया। बहन-भाइयों से अलगाव रहा होगा और परिस्थितिवश उनका त्याग भी कर दिया हो, कारण चाहे कुछ भी रहा। 

उपाय – यदि किसी भी व्यक्ति की कुंडली में रुचक योग बनकर भी भंग हो रहा हो तब व्यक्ति को बहन-भाइयों के साथ अच्छा व्यवहार बनाये रखना चाहिए। यदि बहन-भाई नहीं है तब अपने आसपास के लोगों के साथ, रिश्तेदारों के साथ और अपने कार्यक्षेत्र पर भी भाई-बहन जैसा व्यवहार लोगों के साथ करना चाहिए। 

भद्र योग 

जन्म कुंडली में बुध यदि केंद्र स्थान में स्वराशि में है तब भद्र नामक पंचमहापुरुष योग बनता है। बुध अपनी राशि कन्या में ही उच्च का होता है इसलिए बुध अपनी सिर्फ दो राशियों में ही भद्र योग बनाते हैं – मिथुन और कन्या। बुध को केन्द्राधिपति दोष भी लगता है लेकिन पंचमहापुरुष योग बनने से दोष का प्रभाव कम होता है। 

जन्म कुंडली में भद्र योग बनने का अर्थ है कि व्यक्ति ने पूर्व जन्म में अपनी शिक्षा को अपने सभी शिष्यों में बाँट दिया होगा अर्थात गुरु-शिष्य परम्परा को आगे बढ़ाया। जितना भी ज्ञान आपने पूर्व जन्म में अर्जित किया था वो सारा अपने शिष्यों को दे दिया। 

जन्म कुंडली में यदि भद्र नामक पंचमहापुरुष योग किसी भी ग्रह स्थिति से भंग हो जाता है तब इसका अर्थ है कि आपकी शिक्षा व आपका ज्ञान आपकी मृत्यु के साथ ही चला गया और आपने कभी शिष्यों को पूरी शिक्षा दी ही नहीं। 

उपाय – आपके पास जो भी ज्ञान है वह आप खुले दिल से सभी के साथ बांटे। अगर आपका प्रोफेशन शिक्षा अथवा इसी तरह के किसी क्षेत्र से जुड़ा है तब तो आपको अपने पास कुछ रखना ही नहीं अर्थात जो भी ज्ञान आपके पास उपलब्ध है वह सभी आपको बाँट देना चाहिए। कभी मन में यह नहीं लाना कि मेरे पास कुछ तो अलग होना चाहिए अर्थात कुछ नहीं रखना है सभी आगे बांटने से ही इस योग भंग में कुछ राहत मिल सकती है। 

हंस योग 

जन्म कुंडली में गुरु यदि केंद्र स्थान में स्वराशि अथवा अपनी उच्च राशि (धनु, मीन अथवा कर्क) में स्थित है तब हंस नामक पंचमहापुरुष योग का निर्माण होता है। गुरु को वैसे द्वि-स्वभाव राशियों (मिथुन, कन्या, धनु और मीन लग्न)) में केन्द्राधिपति दोष लगता है लेकिन इस योग के बनने से दोष कम हो जाता है लेकिन कोई पाप प्रभाव नहीं होगा तब ही यह दोष कम होगा अन्यथा नहीं होगा। 

जन्म कुंडली में हंस योग बनने का अर्थ है कि पूर्व जन्म में व्यक्ति ने शिव् मंदिर का निर्माण कराया है जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान जन्म में उसकी कुंडली में हंस नामक पंचमहापुरुष योग का निर्माण हुआ है। इस योग कि एक विशेष बात यह भी है कि हंस योग के निर्माण में गुरु अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में वक्री अवस्था में होकर हंस योग बनाता है तब व्यक्ति को पिछले जन्म के कुछ अधूरे कर्म इस जन्म में पूर्ण करने हैं। 

जन्म कुंडली के अंदर किसी भी ग्रह स्थिति की वजह से यह हंस योग भंग हो जाता है तब इसके फल नहीं मिलेंगे (योग भंग के कारण इस लेख के शुरू में बताये गए हैं)। हंस योग के भंग होने का कारण यह है कि व्यक्ति ने अपने पूर्व जन्म में किसी शिव मंदिर की संपत्ति को अनैतिक तरीके से हड़प लिया था। 

उपाय – वर्तमान जन्म में संपत्ति को किसी तरह से वापिस नहीं किया जा सकता है लेकिन मंदिर में श्रद्धा-भक्ति से सेवा करने तथा सामर्थ्यानुसार दान करने से कुछ ठीक किया जा सकता है। 

मालव्य योग 

जन्म कुंडली में शुक्र केंद्र स्थान में स्वराशि अथवा उच्च राशि (वृष, तुला अथवा मीन) में स्थित हो तब मालव्य नामक पंचमहापुरुष योग का निर्माण होता है। इस जन्म में इस योग के बनने का अर्थ है कि व्यक्ति ने पूर्व जन्म में अपने जीवनसाथी के प्रति पूरी निष्ठा रखी है। दाम्पत्य जीवन काफी खुशहाल रहा है। जीवनसाथी को किसी भी तरह से कष्ट कभी नहीं पहुँचाया। 

यदि जन्म कुंडली में किसी भी ग्रह स्थिति की वजह से मालव्य योग भंग हो जाता है तब इसका अर्थ है कि पूर्व जन्म में जीवनसाथी के प्रति निष्ठा नहीं थी, वैवाहिक जीवन कलहपूर्ण था और जीवनसाथी को काफी यातनाएं आपने दी है। ऐसी मान्यता है कि वर्तमान जीवन में भी यदि जीवनसाथी के प्रति निष्ठा नहीं है या कलह किया जाता है अथवा किसी भी तरह से प्रताड़ित किया जाता है तब इस योग का पूरा फल नहीं मिलेगा।  

उपाय – इसका सीधा और सरल उपाय यही है कि जीवनसाथी के साथ उचित व्यवहार किया जाए और वैवाहिक जीवन को सुचारु रूप से चलाने के लिए सामंजस्य स्थापित करें। 

शश योग 

जन्म कुंडली में यदि शनि केंद्र स्थान में स्वराशि अथवा अपनी उच्च राशि (मकर, कुम्भ अथवा तुला) में स्थित है तब शश नामक पंचमहापुरुष योग बनता है। किसी भी व्यक्ति की कुंडली में इस योग के निर्माण का अर्थ है कि पूर्व जन्म में व्यक्ति ने अपने सेवकों अर्थात नौकरों का पूरा ख्याल रखा है और कभी उनके साथ दुर्व्यवहार नहीं किया। 

अगर किसी कुंडली में शश योग भंग हो रहा है तब इसका अर्थ है कि व्यक्ति ने पूर्व जन्म में अपने नौकरों के साथ काफी अनुचित व्यवहार किया है और सदा उन्हें दुःख दिया और प्रताड़ित किया है। 

उपाय – इसका उपाय है कि नौकरों के साथ अनुचित व्यवहार न करें। यदि नौकर-चाकर घर में नहीं है तब जो भी श्रमिक वर्ग के लोग हैं उनके साथ अच्छा व्यवहार रखें।  

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