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केतु के मंत्र

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केतु को सर्प का धड़ माना गया है और सिर के बिना धड़ को कुछ दिखाई नहीं देता कि क्या किया जाए और क्या नहीं. केतु की दशा में अकसर लोगों का मन विचलित रहते देखा गया है. बिना कारण की परेशानियाँ जीवन में आ जाती हैं. यदि कुण्डली में केतु शुभ भी है तब भी इसकी दशा में मंत्र जाप अवश्य करने चाहिए. केतु की दशा में नीचे लिखे गए किसी भी एक मंत्र का चुनाव व्यक्ति को कर लेना चाहिए और मंगलवार के दिन संध्या समय से इसका जाप आरंभ कर देना चाहिए.

 

वैदिक मंत्र

“ऊँ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेश से। सुमुषद्भिरजायथा:”

 

पौराणिक मन्त्र

“पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्।

रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्।।”

 

तांत्रोक्त मंत्र

“ऊँ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं स: केतवे नम:”

“ह्रीं केतवे नम:”

“कें केतवे नम:”

 

बीज मंत्र

“ऊँ कें केतवे नम:”

 

केतु गायत्री मंत्र

“ऊँ धूम्रवर्णाय विद्महे कपोतवाहनाय धीमहि तन्नं: केतु: प्रचोदयात।”

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