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शयनादि अवस्थाएँ

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शयनादि अवस्थाओं के सामान्य परिणाम – Result of Shayanadi Avastha in Astrology
पराशर होरा शास्त्र में पराशर जी ने सभी ग्रहों की शयनादि अवस्थाओं के बारे में कुछ सामान्य परिणाम बताए हैं, जो निम्नलिखित हैं :-


  • जन्म कुंडली में यदि सभी शुभ ग्रह शयनावस्था में स्थित है तब नि:संदेह व्यक्ति को सदा शुभ फल प्राप्त होते हैं.
  • यदि जन्म कुंडली में अशुभ ग्रह भोजनावस्था में स्थित है तब सभी शुभ फल नष्ट हो जाते हैं विशेषतौर पर जिन भावों से यह संबंधित होते हैं उनके फलों को नष्ट कर देते हैं.
  • यदि कोई अशुभ ग्रह कुंडली के सप्तम भाव में निद्रावस्था में स्थित है तब व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है यदि इस पर किसी अन्य अशुभ की दृष्टि ना आ रही हो.
  • यदि पंचम भाव में कोई अशुभ ग्रह निद्रावस्था अथवा शयनावस्था में स्थित है तब व्यक्ति को अशुभ फल की बजाय शुभ फल ही मिलेगें.
  • जन्म कुंडली के अष्टम भाव में अशुभ ग्रह निद्रा अथवा शयनावस्था में स्थित होता है तब शाही अथवा सरकार के प्रकोप के कारण व्यक्ति की असामयिक मृत्यु हो सकती है.
  • यदि अष्टम भाव में शुभ ग्रह, अशुभ ग्रह के साथ युति कर के वही स्थित है या अष्टम में अशुभ ग्रह स्थित है और शुभ ग्रह उसे देख रहा है तब व्यक्ति की मृत्यु ऎसे धार्मिक स्थान पर होती है जहाँ पवित्र नदी भी बह रही हो, जैसे गंगा.
  • यदि कुंडली में दसवें भाव में अशुभ ग्रह शयनावस्था या भोजनावस्था में स्थित है तब व्यक्ति अपने ही कर्मों के कारणों से दुखी रहता है.
  • यदि जन्म कुंडली के दसवें भाव में चंद्रमा कौतुकावस्था अथवा प्रकाशावस्था में स्थित है तब चंद्र की यह स्थिति राजयोग के समान मानी जाती है.
उपरोक्त ग्रहों का फलकथन बताने से पूर्व व्यक्ति को सभी ग्रहों का बल और उनकी कमजोरी को भी अवश्य जानना चाहिए. महर्षि पराशर ने ग्रहों की बहुत सी अवस्थाओं का वर्णन किया है लेकिन उन्होने साथ ही ग्रहों की युति, योग तथा अन्य संबंधों पर भी बल दिया है.
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