सूर्य षष्ठी व्रत 2020

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इस वर्ष 20 नवंबर 2020 से सूर्य षष्ठी व्रत का आरंभ होगा. कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्य षष्ठी व्रत किया जाता है. जो स्त्रियाँ इस व्रत को विधि-विधान से पूर्ण करती हैं वह धन-धान्य, पति-पुत्र तथा सुख से संपन्न रहती हैं. इस व्रत को करने का कठोर नियम है और इसे तीन दिन तक किया जाता है. जो महिलाएँ इस व्रत को करती हैं वह पंचमी को नमक रहित भोजन करती हैं. दूसरे दिन निर्जल रहकर व्रत किया जाता है. षष्ठी के दिन ही अस्त होते सूर्य को विधिपूर्वक पूजा कर के अर्ध्य दिया जाता है. 

व्रत के तीसरे दिन सुबह जल्दी उठकर नदी अथवा तालाब पर जाकर स्नान किया जाता है. स्नान के बाद जल में खड़े होकर ही उगते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है उसके बाद व्रत खोलते हैं. 

 

सूर्य षष्ठी की कहानी

एक बार विन्दुसार तीर्थ में महीपाल नाम का एक बनिक रहता था. वह धर्म-कर्म में विश्वास नहीं रखता था और देव पूजा का विरोधी था. एक बार सूर्य भगवान की प्रतिमा के सामने ही मल-मूत्र का त्याग कर दिया. जिसके कारण उसकी आँखों की ज्योति चली गई, वह अंधा हो गया. इस पर वह अपने जीवन से हताश होकर गंगा जी में डूबकर मरने के लिए चल दिया. रास्ते में उसकी भेंट महर्षि नारद से हो गई. नारद जी ने उसे रोककर पूछा कि इतनी जल्दी-जल्दी कहाँ जा रहे हैं? महीपाल रोते हुए बोला कि मेरा जीवन दूभर हो गया है इसलिए गंगा जी में कूदने जा रहा हूँ. 

नारद बोले कि मूर्ख व्यक्ति तुम्हारी यह दशा भगवान सूर्यदेव के कारण हुई है. अगर तुम ठीक होना चाहते हो तो कार्तिक माह की सूर्यषष्ठी का व्रत किया करो. इस व्रत के प्रभाव से तुम्हारे सभी कष्ट दूर होगें. बनिक ने नारद जी के कहे अनुसार व्रत रखा. इस व्रत के प्रभाव से वह सुखी हुआ और दिव्य दृष्टि पा अंत में स्वर्ग का भागी बन गया.