धन तेरस 2020

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वर्ष 2020 में धनतेरस 13 नवंबर, दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी. धन तेरस को कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है. धन तेरस को मनाने का प्राचीन प्रमाण वैदिक साहित्य में भी पाया गया है. जैसे कि यमराज को वैदिक देवता माना गया है इसलिए इस दिन यमराज की भी पूजा की जाती है. इस दिन लक्ष्मी का आवास घरों में होता है. इस दिन संध्या समय में एक दीपक घर के मुख्य द्वार के पास जलाया जाता है. कई स्थानों पर इसे नाली के पास जलाया जाता है. 

इस दिन नए बर्तन खरीदने की परंपरा है. कई लोग अपनी सामर्थ्यानुसार इस दिन चाँदी की वस्तु भी खरीदते हैं. 

 

धन तेरस की कथा

एक बार विष्णु जी, लक्ष्मी जी के साथ पृथ्वी पर भ्रमण करने आए. कुछ समय बाद विष्णु जी कहने लगे कि मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूँ तुम उधर मत देखना और उत्तर दिशा की ओर जाना लेकिन विष्णु जी जैसे ही दक्षिण दिशा की ओर मुड़े लक्ष्मी जी तभी उनके पीछे चल दी. कुछ दूर जाने पर गन्ने का खेत आया तो वह तोड़कर चूसने लगी. विष्णु जी ने देखा तो वह बहुत क्रोधित हुए और लक्ष्मी जी को श्राप देते हुए कहा कि जिसका यह खेत है तुम 12 वर्षों तक उसकी सेवा करो. इतना कहकर वह क्षीरसागर को चले गए. लक्ष्मी जी किसान के यहाँ रहने लगी और उसे धनधान्य से पूर्ण कर दिया. 

12 वर्ष पूरे होने पर लक्ष्मी जी जाने लगी तो किसान ने उन्हें रोक लिया. विष्णु जी जब लक्ष्मी जी को लेने आए तब भी किसान ने उन्हें नहीं जाने दिया. इस पर भगवान बोले कि तुम परिवार सहित गंगा स्नान को जाओ और मैं तुम्हें जो कौड़ियाँ दे रहा हूँ उन्हें गंगा जी में छोड़ देना. जब तक तुम वापिस नहीं आओगे हम नहीं जाएंगे. किसान ने भगवान के कहे अनुसार किया. उसने जैसे ही कौड़ियाँ गंगा में डाली वैसे ही चार चतुर्भुज निकलें और कौड़ियाँ लेकर जाने लगे. किसान ने आश्चर्य चकित होकर गंगा जी से पूछा कि ये चार भुजाएँ किसकी थी? गंगा जी ने कहा कि हे किसान ! वे चारों भुजाएँ मेरी ही थी. 

गंगा जी ने किसान से पूछा कि तुमने जो कौड़ियाँ मुझे भेंट की है वे तुम्हें किसने दी है? किसान ने कहा कि मेरे घर मे दो सज्जन आए हुए हैं, उन्होने दी हैं. अब गंगाजी कहती हैं कि तुम्हारे घर जो पुरुष है वह विष्णु जी हैं और जो स्त्री है वह लक्ष्मी जी हैं. तुम लक्ष्मी जी को जाने मत देना नहीं तो फिर से वैसे ही निर्धन हो जाओगे. किसान जब वापिस लौटा तो भगवान से बोला कि मैं इन्हें नहीं जाने दूँगा. इस पर भगवान बोले कि इन्हें मेरा श्राप था जो 12 वर्ष तक तुम्हारी सेवा कर रही थी और लक्ष्मी जी तो चंचल हैं वह एक जगह नहीं ठहर सकती. इन्हें तो बड़े-बड़े नहीं रोक पाए. लेकिन किसान जिद पर अड़ गया कि वह लक्ष्मी जी को नहीं जाने देगा. 

किसान की जिद सुनकर लक्ष्मी जी कहने लगी कि अगर तुम मुझे रोकना चाहते हो तो सुनो, कल धन तेरस है. तुम अपना घर साफ करना और शाम को दीपक जलाकर रखना तब मैं तुम्हारे घर आऊँगी. उस समय तुम मेरी पूजा करना लेकिन मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी. किसान ने कहा ठीक है मैं ऎसा ही करुंगा और उसके बाद लक्ष्मी जी दसों दिशाओं में फैल गई, विष्णु जी देखते रह गए. किसान ने अगले दिन वैसा ही किया जैसा लक्ष्मी जी ने कहा था और उसका घर धन-धान्य से भर गया. इस तरह वह किसान हर वर्ष धन तेरस के दिन लक्ष्मी जी की पूजा करने लगा. उस किसान को पूजा करते देख अन्य लोगों ने भी पूजा करना आरंभ कर दिया. 

 

दुर्घटना अथवा अपमृत्यु टालने का मंत्र 

धन तेरस के दिन परिवार के सभी सदस्यों को दक्षिण दिशा की ओर मुँह कर के यमराज को प्रसन्न करने के लिए दीपक जलाकर निम्न मंत्र पढ़ना चाहिए. 

मंत्र – मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह । 

        त्रयोदश्यां दीपदानात पूर्यज: प्रीयतां मम ।।

इसका अर्थ है कि मृत्यु काल में जंजीर और दण्ड धारण किए हुए और भैंसे पर सवार सूर्य पूत्र यमराज मैं आपको त्रयोदशी के दिन दीपदन कर रहा हूँ/रही हूँ  अपमृत्यु से मेरी रक्षा करें, इससे मुझे बचाइए. 

 

धन तेरस के दिन एक अन्य कथा यमराज जी की भी कही जाती है, जिसके लिए आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें:-

https://chanderprabha.com/2019/10/20/dhanteras-ki-katha/

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