बीमारी कब होगी?

एक अच्छे स्वास्थ्य को देखने के लिए जन्म कुंडली में कई बातों पर ध्यान देना जरुरी है केवल लग्न अथवा लग्नेश का संबंध छठे, आठवें अथवा बारहवें से होने पर स्वास्थ्य विकार नहीं हो सकते। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के लिए तो सबसे पहले जन्म कुंडली में योगों का होना जरुरी है अगर जन्म कुंडली में…

श्रीदुर्गापदुद्धारस्तोत्रम्

नमस्ते शरण्ये शिवे सानुकम्पे नमस्ते जगद्व्यापिकेविश्वरूपे। नमस्ते जगद्वन्द्यपादारविन्दे नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे।।1।। नमस्ते जगच्चिन्त्यमानस्वरूपे नमस्ते महायोगिनि ज्ञानरूपे। नमस्ते नमस्ते सदानन्दूपे नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे।।2।। अनाथस्य दीनस्य तृष्णातुरस्य भयार्तस्य भीतस्य बद्धस्य जन्तो:। त्वमेका गतिर्देवि निस्तारकर्त्री नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे।।3।। अरण्ये रणे दारुणे शत्रुमध्ये- Sनले सागरे प्रान्तरे राजगेहे। त्वमेका गतिर्देवि निस्तारनौका नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे।।4।। अपारे महादुस्तरेSत्यन्तघोरे…

प्रात: स्मरणम् – परब्रह्मण:

प्रात: स्मरामि हृदि संस्फुरदात्मतत्त्वं सच्चित्सुखं परमहंसगतिं तुरीयम् । यत्स्वप्नजागरसुषुप्तिमवैति नित्यं तद्ब्रह्म निष्कलमहं न च भूतसंघ:।।1।। अर्थ – मैं प्रात:काल, हृदय में स्फुरित होते हुए आत्मतत्त्व का स्मरण करता/करती हूँ, जो सत, चित और आनन्दरूप है, परमहंसों का प्राप्य स्थान है और जाग्रदादि तीनों अवस्थाओं से विलक्षण है, जो स्वप्न, सुषुप्ति और जाग्रत अवस्था को नित्य…

श्रीराधाष्टकम्

नमस्ते श्रियै राधिकायै परायै नमस्ते नमस्ते मुकुन्दप्रियायै। सदानन्दरूपे प्रसीद त्वमन्त:- प्रकाशे स्फुरन्ती मुकुन्देन सार्धम् ।।1।। अर्थ – श्रीराधिके! तुम्हीं श्री लक्ष्मी हो, तुम्हें नमस्कार है, तुम्हीं पराशक्ति राधिका हो, तुम्हें नमस्कार है। तुम मुकुन्द की प्रियतमा हो, तुम्हें नमस्कार है। सदानन्दस्वरूपे देवि! तुम मेरे अन्त:करण के प्रकाश में श्यामसुन्दर श्रीकृष्ण के साथ सुशोभित होती हुई…