रत्नों का शुद्धिकरण

ग्रहों को बल प्रदान करने के लिए रत्न धारण की सलाह आमतौर पर दे दी जाती है लेकिन रत्नों को धारण करने से पूर्व उनका शुद्धिकरण आवश्यक है। जब कोई भी रत्न खरीदा जाता है अथवा किसी के द्वारा दिया जाता है तब उस रत्न के पीछे का इतिहास कोई नहीं जानता कि क्या है…

जन्म कुंडली में धनयोग

जन्म कुंडली में धनयोग कई प्रकार से बनता है। एक धनयोग तो प्रत्यक्ष रुप से बनता है तो कई कुंडलियों में व्यक्ति अपने परिश्रम से धनवान बनता है तो कई कुंडलियाँ ऎसी भी होती हैं जिनमें धन अकस्मात बिना किसी परिश्रम के मिल जाता है। कुंडली में मिलने वाले अनेकों प्रकार के धनयोग का वर्णन…

सुरभिस्तोत्रम्

महेन्द्र उवाच नमो देव्यै महादेव्यै सुरभ्यै च नमो नम:। गवां बीजस्वरूपायै नमस्ते जगदम्बिके।।1।। नमो राधाप्रियायै च पद्मांशायै नमो नम:। नम: कृष्णप्रियायै च गवां मात्रे नमो नम:।।2।। अर्थ – देवी एवं महादेवी सुरभि को बार-बार नमस्कार है। जगदम्बिके! तुम गौओं की बीजस्वरुपा हो, तुम्हें नमस्कार है। तुम श्रीराधा को प्रिय हो, तुम्हें नमस्कार है। तुम लक्ष्मी…

नारंगी रंग (Orange Colour) का महत्व

लाल व पीला ये दोनों रंग मुख्य रंगों में गिने जाते हैं और इन दोनों रंगों के मिलने से नारंगी रंग बनता है। अगर ज्योतिष की बात की जाए तो ये रंग चंद्रमा का माना गया है। कालपुरुष की कुंडली के अनुसार चंद्रमा चौथे भाव का स्वामी बनता है और वैसे भी चंद्रमा को चतुर्थ…

लाल रँग का महत्व

लाल रँग को सूर्य और मंगल के अधिकार क्षेत्र में रखा गया है और इस रँग का संबंध गर्मजोशी तथा अधिकार अथवा पॉवर से भी जोड़ा जाता है क्योंकि सूर्य तथा मंगल ये दोनों ही चीजें प्रदान करते हैं. सूर्य सरकार (क्योंकि सूर्य को ग्रहों में राजा की उपाधि दी गई है) तो मंगल सेनापति…

राहु तथा केतु पर्वत

हथेली में इस पर्वत का क्षेत्र ठीक बीचों बीच, मस्तिष्क रेखा के नीचे, मंगल तथा शुक्र पर्वत के पास माना गया है। भाग्य रेखा इसी पर्वत से होकर शनि पर्वत तक जाती है। राहु का जो क्षेत्र माना गया है अगर वह अत्यन्त पुष्ट और उन्नत है तब ऎसा व्यक्ति निश्चित रूप से भाग्यवान होता…

शुक्र पर्वत अथवा शुक्र क्षेत्र

हाथ में अँगूठा की जड़ के नीचे का पूरा क्षेत्र जो आयु रेखा से घिरा हुआ रहता है वह शुक्र पर्वत कहलाता है। यूनान में शुक्र को “सुन्दरता की देवी” कहा गया है। जिन व्यक्तियों के हाथ में शुक्र पर्वत श्रेष्ठ स्तर का रहता है वह सुन्दर होने के साथ पूर्णतया सभ्य होते हैं। ऎसे…

मंगल क्षेत्र अथवा मंगल पर्वत

हथेली में मंगल के दो क्षेत्र पाए जाते हैं जो उन्नत मंगल (Positive Mars) और अवनत मंगल (Negetive Mars) के नाम से जाने जाते हैं। जीवन रेखा हथेली में जहाँ से शुरु होती है उसके नीचे का क्षेत्र तथा उससे घिरा हुआ शुक्र पर्वत के ठीक ऊपर फैले हुए भाग को मंगल क्षेत्र के कहते…

चन्द्र क्षेत्र अथवा चन्द्र पर्वत

वैसे तो चंद्रमा को पृथ्वी का उपग्रह माना जाता है लेकिन नवग्रहों में चंद्रमा को ग्रह के रुप में स्वीकारा गया है। चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे निकट होने से मनुष्य के मन पर गहरी छाप छोड़ता है। सही मायनों में इस ग्रह को सुन्दरता और कल्पना का कारक माना गया है। देखने में सुन्दर तथा…

चंद्रमा

जन्म कुंडली में चंद्रमा सबसे ज्यादा सौम्य ग्रह माना जाता है और कुंडली के अनुसार मन का कारक ग्रह है। सभी ग्रहों को देवता रुप में पूजा जाता है इसलिए चंद्रमा को भी देवता माना गया है। चंद्र देव का वर्ण गोरा है और इनके वस्त्र, अश्व तथा रथ तीनों ही श्वेत वर्ण के हैं।…

बुध क्षेत्र अथवा बुध पर्वत

कनिष्ठिका अंगुली (Little Finger) अथवा हाथ की सबसे छोटी अंगुली की जड़ के नीचे वाले भाग को बुध क्षेत्र अथवा बुध पर्वत के नाम से जाना जाता है। इस पर्वत को भौतिक संपदा तथा भौतिक समृद्धि का सूचक माना जाता है। यही कारण है कि वर्तमान युग में इसका महत्व जरुरत से ज्यादा माना जाता…

सूर्य क्षेत्र अथवा सूर्य पर्वत

हथेली में अनामिका अंगुली (Ring Finger) की जड़ अथवा मूल स्थान के नीचे के क्षेत्र को सूर्य पर्वत अथवा सूर्य क्षेत्र कहा गया है, यह हृदय रेखा के ऊपर की ओर स्थित रहता है। इस सूर्य पर्वत से व्यक्ति की सफलता अथवा असफलताएँ देखी जाती हैं, यह पर्वत किसी भी व्यक्ति की सफलता का सूचक…