वैशाख-माहात्म्य प्रसंग में राजा महीरथ की कथा

यमराज कहते हैं – ब्रह्मन् ! पूर्वकाल की बात है, महीरथ नाम से विख्यात एक राजा थे। उन्हें अपने पूर्वजन्म के  पुण्यों के फलस्वरुप प्रचुर ऎश्वर्य और सम्पत्ति प्राप्त हुई थी परन्तु राजा राज्यलक्ष्मी का सारा भार मन्त्री पर रखकर स्वयं विषयभोग में आसक्त हो रहे थे। वे न प्रजा की ओर दृष्टि डालते थे…

तुलसीदल और अश्वत्थ(पीपल वृक्ष) की महिमा

ब्राह्मण ने पूछा – धर्मराज ! वैशाख मास में प्रात:काल स्नान करके एकाग्रचित्त हुआ पुरुष भगवान माधव का पूजन किस प्रकार करें? आप इसकी विधि का वर्णन करें। धर्मराज ने कहा – ब्रह्मन् ! पत्तों की जितनी जातियाँ हैं, उन सबमें तुलसी, भगवान श्रीविष्णु को अधिक प्रिय है। पुष्कर आदि जितने तीर्थ हैं, गंगा आदि…

वैशाख स्नान – यम/ब्राह्मण संवाद

नरक तथा स्वर्ग में जाने वाले कर्मों का वर्णन ऋषियों ने कहा – सूतजी ! इस विषय को पुन: विस्तार से कहिए। आपके उत्तम वचनामृतों का पान करते-करते हमें तृप्ति नहीं होती है। सूतजी बोले – महर्षियों ! इस विषय में एक प्राचीन इतिहास कहा करते हैं, जिसमें एक ब्राह्मण और महात्मा धर्मराज के संवाद…

वैशाख मास में स्नान, तर्पण, पूजन विधि और महिमा

अम्बरीष ने पूछा – मुने ! वैशाख माह के व्रत का क्या विधान है? इसमें किस तपस्या का अनुष्ठान करना पड़ता है? क्या दान होता है? कैसे स्नान किया जाता है और किस प्रकार भगवान केशव की पूजा की जाती है? ब्रह्मर्षे ! आप श्रीहरि के प्रिय भक्त तथा सर्वज्ञ हैं, अत: कृपा करके मुझे…

वैशाख-स्नान से पाँच प्रेतों का उद्धार

अम्बरीष ने कहा – मुने ! जिसके चिन्तन मात्र से पाप राशि का लय हो जाता है, उस पाप प्रशमन नामक स्तोत्र को मैं भी सुनना चाहता हूँ। आज मैं धन्य हूँ, अनुगृहीत हूँ, आपने मुझे उस शुभ विधि का श्रवण कराया, जिसके सुनने मात्र से पापों का क्षय हो जाता है। वैशाख मास में…

वैशाख – माहात्म्य

सूतजी कहते हैं – महात्मा नारद के वचन सुनकर राजर्षि अम्बरीष ने विस्मित होकर कहा – “महामुने ! आप मार्गशीर्ष (अगहन) आदि पवित्र महीनों को छोड़कर वैशाख मास की ही इतनी प्रशंसा क्यों करते हैं? उसी को सब मासों में श्रेष्ठ क्यों बतलाते हैं? यदि माधवमास सबसे श्रेष्ठ और भगवान लक्ष्मीपति को अधिक प्रिय है…

वैशाख माह – माहात्म्य

भगवद्भक्ति के लक्षण तथा वैशाख स्नान की महिमा अम्बरीष बोले – मुनिश्रेष्ठ ! आपने बड़ी अच्छी बात बतायी, इसके लिए आपको धन्यवाद है। आप संपूर्ण लोकों पर अनुग्रह करने वाले हैं। आपने भगवान विष्णु के सगुण एवं निर्गुण ध्यान का वर्णन किया, अब आप भक्ति का लक्षण बतलाइए। साधुओं पर कृपा करने वाले महर्षे !…

गरुड़ पुराण – सोलहवाँ अध्याय

मनुष्य शरीर प्राप्त करने की महिमा, धर्माचरण ही मुख्य कर्तव्य, शरीर और संसार की दु:खरूपता तथा नश्वरता, मोक्ष-धर्म-निरूपण   गरुड़ उवाच गरुड़ जी ने कहा – हे दयासिन्धो ! अज्ञान के कारण जीव जन्म-मरणरूपी संसार चक्र में पड़ता है, यह मैंने सुना। अब मैं मोक्ष के सनातन उपाय को सुनना चाहता हूँ। हे भगवन !…

गरुड़ पुराण – पंद्रहवाँ अध्याय

धर्मात्मा जन का दिव्यलोकों का सुख भोगकर उत्तम कुल में जन्म लेना, शरीर के व्यावहारिक तथा पारमार्थिक दो रूपों का वर्णन, अजपाजप की विधि, भगवत्प्राप्ति के साधनों में भक्ति योग की प्रधानता   गरुड़ उवाच गरुड़ जी ने कहा – धर्मात्मा व्यक्ति स्वर्ग के भोगों को भोगकर पुन: निर्मल कुल में उत्पन्न होता है इसलिए…

गरुड़ पुराण – चौदहवाँ अध्याय

यमलोक एवं यमसभा का वर्णन, चित्रगुप्त आदि के भवनों का परिचय, धर्मराज नगर के चार द्वार, पुण्यात्माओं का धर्म सभा में प्रवेश   गरुड़ उवाच गरुड़ जी ने कहा – हे दयानिधे ! यमलोक कितना बड़ा है? कैसा है? किसके द्वारा बनाया हुआ है? वहाँ की सभा कैसी है और उस सभा में धर्मराज किनके…

गरुड़ पुराण – तेरहवाँ अध्याय

अशौचकाल का निर्णय, अशौच में निषिद्ध कर्म, सपिण्डीकरण श्राद्ध, पिण्डमेलन की प्रक्रिया, शय्यादान, पददान तथा गया श्राद्ध की महिमा   गरुड़ उवाच गरुड़जी ने कहा – हे प्रभो! सपिण्डन की विधि, सूतक का निर्णय और शय्यादान तथा पददान की सामग्री एवं उनकी महिमा के विषय में कहिए।   श्रीभगवानुवाच श्रीभगवान ने कहा – हे तार्क्ष्य!…

अभिनेता बनने के ज्योतिषीय योग

अभिनय (Acting) क्या है? अभिनय का अर्थ है कि कोई व्यक्ति किसी दूसरे की नकल कर रहा है। दूसरे की नकल करने के लिए या जो आपको भूमिका दी गई है उसे बखूबी निभाने के लिए बुद्धिमान होने के साथ आपकी याद्दाश्त भी अच्छी होनी चाहिए क्योंकि आपको डायलॉग याद करने पड़ेगें ताकि बिना देखे…