विष्णु षटपदी

अविनयमपनयविष्णो दमयं मन: शमयविषयमृगतृष्णां । भूतदयां विस्तारय तारय संसारसागरात:।।1।। अर्थ – हे विष्णु भगवान ! मेरी उद्दण्डता दूर कीजिए. मेरे मन का दमन कीजिए और विषयों की मृगतृष्णा को शान्त कर दीजिए, प्राणियों के प्रति मेरा दयाभाव बढ़ायें और इस संसार-समुद्र से मुझे पार लगाइये.   दिव्यधुनीमकरन्दे परिमलपरिभोगसच्चिदानन्दे । श्रीपतिपदारविन्दे भवभयखेदच्छिदे वन्दे ।।2।। अर्थ –…

श्री विष्णु चालीसा

                               ।।दोहा।। जय जय जय श्री जगत पति, जगदाधार अनन्त। विश्वेश्वर अखिलेश अज, सर्वेश्वर भगवन्त।।                                   ।।चौपाई।। जय जय धरणी-धर श्रुति सागर। जयति गदाधर सदगुण…

खग्रास चन्द्रग्रहण – 31 जनवरी, 2018

31 जनवरी, सन 2018, दिन बुधवार, माघ पूर्णिमा के दिन सायंकाल से खग्रास चन्द्रग्रहण सारे भारतवर्ष में दिखाई देगा. इस ग्रहण की खग्रास आकृति सारे भारत में देखी जाएगी. यह ग्रहण मिजोरम, अरु-प्रदेश, आसाम, सिक्किम, मेघालय, पूर्वी पश्चिम बंगाल में चन्द्रोदय के बाद आरम्भ होगा. भारत के अन्य भागों में इस ग्रहण का आरंभ चन्द्रोदय…

श्रीमणिकर्णिकाष्टकम्

त्वत्तीरे मणिकर्णिके हरिहरौ सायुज्यमुक्तिप्रदौ वादं तौ कुरुत: परस्परमुभौ जन्तौ: प्रयाणोत्सवे। मद्रूपो मनुजोSयमस्तु हरिणा प्रोक्त: शवस्तत्क्षणात् तन्मध्याद् भृगुलाण्छनो गरुडग: पीताम्बरो निर्गत:।।1।। अर्थ – हे मणिकर्णिके! आप के तट पर भगवान विष्णु और शिव सायुज्य मुक्ति प्रदान करते हैं. (एक बार) जीव के महाप्रयाण के समय वे दोनों (उस जीव को अपने-अपने लोक ले जाने के लिए)…

चंद्रमा की दशा के फल

चंद्रमा जन्म कुंडली में जिस अवस्था में होगा उसी के अनुसार उसकी दशा/अन्तर्दशा में फल मिलेगें. इस लेख में चंद्रमा की भिन्न-भिन्न अवस्थाओं के अनुसार फलकथन कहने का प्रयास किया गया है. परमोच्च व उच्च चन्द्र के फल – Results For Exalted Moon अगर किसी की जन्म कुंडली में चंद्रमा अपने परमोच्च अंशों(चंद्रमा वृष राशि…

गंगा स्तुति

जय जय भगीरथनन्दिनि, मुनि-चय चकोर-चन्दिनि, नर-नाग-बिबुध-बन्दिनि जय जह्नु बालिका। बिस्नु-पद-सरोजजासि, ईस-सीसपर बिभासि, त्रिपथगासि, पुन्यरासि, पाप-छालिका।।1।। अर्थ – हे भगीरथनन्दिनी! तुम्हारी जय हो, जय हो. तुम मुनियों के समूह रूपी चकोरो के लिए चन्द्रिका रूप हो. मनुष्य, नाग और देवता तुम्हारी वन्दना करते हैं. हे जह्नु की पुत्री! तुम्हारी जय हो. तुम भगवान विष्णु के चरण…

देवीस्तोत्रम्

श्रीभगवानुवाच नमो देव्यै प्रकृत्यै च विधात्र्यै सततं नम:। कल्याण्यै कामदायै च वृद्धयै सिद्धयै नमो नम:।।1।।   सच्चिदानन्दरूपिण्यै संसारारणयै नम:। पंचकृत्यविधात्र्यै ते भुवनेश्यै नमो नम:।।2।।   सर्वाधिष्ठानरूपायै कूटस्थायै नमो नम:। अर्धमात्रार्थभूतायै हृल्लेखायै नमो नम:।।3।।   ज्ञातं मयाsखिलमिदं त्वयि सन्निविष्टं त्वत्तोsस्य सम्भवलयावपि मातरद्य। शक्तिश्च तेsस्य करणे विततप्रभावा ज्ञाताsधुना सकललोकमयीति नूनम्।।4।।   विस्तार्य सर्वमखिलं सदसद्विकारं सन्दर्शयस्यविकलं पुरुषाय काले।…

अश्लेषा नक्षत्र और व्यवसाय

अश्लेषा नक्षत्र कर्क राशि में 16 अंश 40 कला से 30 अंश तक रहता है. इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है. इस नक्षत्र के अन्तर्गत निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं :- इस नक्षत्र के अन्तर्गत नशीले पदार्थों का कार्य, विष से संबंधित व्यवसाय, कीटनाशक दवाएँ, विष द्वारा उपचार के कार्य, दवाईयाँ भी विष की श्रेणी…

दशमयीबालात्रिपुरसुन्दरीस्तोत्रम्

दशमयीबालात्रिपुरसुन्दरीस्तोत्रम् श्रीकाली बगलामुखी च ललिता धूम्रावती भैरवी मातंगी भुवनेश्वरी च कमला श्रीवज्रवैरोचनी। तारा पूर्वमहापदेन कथिता विद्या स्वयं शम्भुना लीलारूपमयी च देशदशधा बाला तु मां पातु सा।।1।। अर्थ – प्रारंभ से ही सर्वोत्कृष्ट पद धारण करने वाले स्वयं भगवान शिव के द्वारा श्रीकाली, बगलामुखी, ललिता, धूम्रावती, भैरवी, मातंगी, भुवनेश्वरी, कमला, श्रीवज्रवैरोचनी तथा तारा – इन दस…

तन्त्रोक्तं रात्रिसूक्तम्

{योगनिद्रास्तुति:} ऊँ विश्वेश्वरीं जगद्धात्रीं स्थितिसंहारकारिणीम्। निद्रां भगवतीं विष्णोरतुलां तेजस: प्रभु:।।1।। अर्थ – जो इस विश्व की अधीश्वरी, जगत को धारण करने वाली, संसार का पालन और संहार करने वाली तथा तेज:स्वरुप भगवान विष्णु की अनुपम शक्ति हैं, उन्हीं भगवती निद्रा देवी की भगवान ब्रह्मा स्तुति करने लगे.                …

माघ माहात्म्य – अठ्ठाईसवाँ अध्याय

वशिष्ठजी कहने लगे कि हे राजा दिलीप! बहुत से जन-समूह सहित अच्छोद सरोवर में स्नान करके सुखपूर्वक मोक्ष को प्राप्त हो गए तब लोमशजी कहने लगे संसार रूपी इस तीर्थ राजा को सब श्रद्धापूर्वक देखो. यहाँ पर तैंतीस करोड़ देवता आकर आनंदपूर्वक रहते हैं. यह अक्षय वट है जिनकी जड़े पाताल तक गई हैं और…

माघ माहात्म्य – सत्ताईसवाँ अध्याय

प्रेत कहने लगा कि हे पथिक! मैं इस समय तुम्हारे पास जो यह गंगा जल हैं, उसे माँगता हूँ क्योंकि मैंने इसका बहुत कुछ माहात्म्य सुना है. मैंने इस पर्वत पर गंगा जल का बड़ा अद्भुत आश्चर्य देखा था इसलिए यह जल मांगता हूँ, मैं प्रेत योनि में अति दुखी हूँ. एक ब्राह्मण अनधिकारी को…