माघ माहात्म्य – छठा अध्याय

पूर्व समय में सतयुग के उत्तम निषेध नामक नगर में हेमकुंडल नाम वाला कुबेर के सदृष धनी वैश्य रहता था. जो कुलीन, अच्छे काम करने वाला, देवता, अग्नि और ब्राह्मण की पूजा करने वाला, खेती का काम करता था. वह गौ, घोड़े, भैंस आदि का पालन करता था. दूध, दही, छाछ, गोबर, घास, गुड़, चीनी…

माघ माहात्म्य – पांचवाँ अध्याय

दत्तात्रेय जी कहते हैं कि हे राजन! एक प्राचीन इतिहास कहता हूँ. भृगुवंश में ऋषिका नाम की एक ब्राह्मणी थी जो बाल्यकाल में ही विधवा हो गई थी. वह रेवा नदी के किनारे विन्ध्याचल पर्वत के नीचे तपस्या करने लगी. वह जितेन्द्रिय, सत्यवक्ता, सुशील, दानशीलता तथा तप करके देह को सुखाने वाली थी. वह अग्नि…

माघ माहात्म्य – चौथा अध्याय

श्री वशिष्ठजी कहने लगे कि हे राजन! अब मैं माघ के उस माहात्म्य को कहता हूँ जो कार्तवीर्य के पूछने पर दत्तात्रेय ने कहा था. जिस समय साक्षात विष्णु के रुप श्री दत्तात्रेय सत्य पर्वत पर रहते थे तब महिष्मति के राजा सहस्रार्जुन ने उनसे पूछा कि हे योगियों में श्रेष्ठ दत्तात्रेयजी! मैंने सब धर्म…

माघ माहात्म्य – तीसरा अध्याय

तब राजा दिलीप कहने लगे कि महाराज यह पर्वत कितना ऊँचा और कितना लंबा-चौड़ा है? तब वशिष्ठ जी कहने लगे कि छत्तीस योजन (एक योजन चार कोस का होता है) ऊँचा ऊपर चोटी में दस योजन चौड़ा और नीचे सोलह योजन चौड़ा है. जो हरि, चंदन, आम, मदार, देवदार और अर्जुन के वृक्षों से सुशोभित…

शनि का धनु राशि में प्रवेश 26 अक्तूबर 2017

वैसे तो शनि महाराज 26 जनवरी 2017 को धनु राशि में प्रवेश कर गये थे लेकिन 6 अप्रैल को वो वक्री हो गये और 20 जून को वापिस वृश्चिक राशि में आ गये. उसके बाद 25 अगस्त को मार्गी होना शुरु कर दिया और अब 26 अक्तूबर को 15:20, या 15:22 या 15:27 पर धनु…

माघ माहात्म्य – दूसरा अध्याय

राजा के ऎसे वचन सुनकर तपस्वी कहने लगा कि हे राजन्! भगवान सूर्य बहुत शीघ्र उदय होने वाले हैं इसलिए यह समय हमारे लिए स्नान का है, कथा का नहीं, सो आप स्नान करके अपने घर को जाओ और अपने गुरु श्री वशिष्ठ जी से इस माहात्म्य को सुनो. इतना कहकर तपस्वी सरोवर में स्नान…

माघ माहात्म्य – पहला अध्याय

एक समय श्री सूतजी ने अपने गुरु श्री व्यासजी से कहा कि गुरुदेव कृपा करके आप मुझे से माघ मास का माहात्म्य कहिए क्योंकि मैं आपका शिष्य हूँ. व्यासजी कहने लगे कि रघुवंश के राजा दिलीप एक समय यज्ञ के स्नान के पश्चात पैरों में जूते और सुंदर वस्त्र पहनकर शिकार की सामग्री से युक्त,…

कार्तिक माह माहात्म्य – पैंतीसवाँ अध्याय

अनुपम कथा कार्तिक, होती है सम्पन्न। इसको पढ़ने से, श्रीहरि होते हैं प्रसन्न।। इतनी कथा सुनकर सभी ऋषि सूतजी से बोले – हे सूतजी! अब आप हमें तुलसी विवाह की विधि बताइए. सूतजी बोले – कार्तिक शुक्ला नवमी को द्वापर युग का आरम्भ हुआ है. अत: यह तिथि दान और उपवास में क्रमश: पूर्वाह्नव्यापिनी तथा…

कार्तिक माह माहात्म्य – चौंतीसवाँ अध्याय

सूतजी ने ऋषियों से, कहा प्रसंग बखान। चौंतीसवें अध्याय पर, दया करो भगवान।। ऋषियों ने पूछा – हे सूतजी! पीपल के वृक्ष की शनिवार के अलावा सप्ताह के शेष दिनों में पूजा क्यों नहीं की जाती? सूतजी बोले – हे ऋषियों! समुद्र-मंथन करने से देवताओं को जो रत्न प्राप्त हुए, उनमें से देवताओं ने लक्ष्मी…

कार्तिक माह माहात्म्य – तैंतीसवाँ अध्याय

दया दृष्टि कर हृदय में, भव भक्ति उपजाओ। तैंतीसवाँ अध्याय लिखूँ, कृपादृष्टि बरसाओ।। सूतजी ने कहा – इस प्रकार अपनी अत्यन्त प्रिय सत्यभामा को यह कथा सुनाकर भगवान श्रीकृष्ण सन्ध्योपासना करने के लिए माता के घर में गये. यह कार्तिक मास का व्रत भगवान विष्णु को अतिप्रिय है तथा भक्ति प्रदान करने वाला है. 1)…

कार्तिक माह माहात्म्य – बत्तीसवाँ अध्याय

मुझे सहारा है तेरा, सब जग के पालनहार। कार्तिक मास के माहात्म्य का बत्तीसवाँ विस्तार।। भगवान श्रीकृष्ण ने आगे कहा – हे प्रिये! यमराज की आज्ञा शिरोधार्य करते हुए प्रेतपति धनेश्वर को नरकों के समीप ले गया और उसे दिखाते हुए कहने लगा – हे धनेश्वर! महान भय देने वाले इन नरकों की ओर दृष्टि…

कार्तिक माह माहात्म्य – इक्कतीसवाँ अध्याय

कार्तिक मास माहात्म्य का, यह इकत्तीसवाँ अध्याय। बतलाया भगवान ने, प्रभु स्मरण का सरल उपाय।। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा – पूर्वकाल में अवन्तिपुरी (उज्जैन)में धनेश्वर नामक एक ब्राह्मण रहता था.वह रस, चमड़ा और कम्बल आदि का व्यापार करता था. वह वैश्यागामी और मद्यपान आदि बुरे कर्मों में लिप्त रहता था. चूंकि वह रात-दिन पाप में…