श्राद्ध 2017

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वर्ष 2017 में पितृ पक्ष श्राद्ध का आरंभ सितंबर 6 से हो रहा है. हर वर्ष आश्विन माह के आरंभ से ही श्राद्ध का आरंभ भी हो जाता है वैसे भाद्रपद माह की पूर्णिमा से ही श्राद्ध आरंभ हो जाता है क्योंकि जिन पितरों की मृत्यु तिथि पूर्णिमा है तो उनका श्राद्ध भी पूर्णिमा को ही मनाया जाता है. इसके बाद आश्विन माह की अमावस्या को श्राद्ध समाप्त हो जाते हैं और पितर अपने पितृलोक में लौट जाते हैं.

माना जाता है कि श्राद्ध का आरंभ होते ही पितर अपने-अपने हिस्से का ग्रास लेने के लिए पृथ्वी लोक पर आते हैं इसलिए जिस दिन उनकी तिथि होती है उससे एक दिन पहले संध्या समय में दरवाजे के दोनों ओर जल दिया जाता है जिसका अर्थ है कि आप अपने पितर को निमंत्रण दे रहे हैं और अगले दिन जब ब्राह्मण को उनके नाम का भोजन कराया जाता है तो उसका सूक्ष्म रुप पितरों तक भी पहुँचता है. बदले में पितर आशीर्वाद देते हैं और अंत में पितर लोक को लौट जाते हैं. ऎसा भी देखा गया है कि जो पितरों को नहीं मनाते वह काफी परेशान भी रहते हैं.

पितृ पक्ष श्राद्ध में ब्राह्मण भोजन से पहले 16 ग्रास अलग-अलग चीजों के लिए निकाले जाते हैं जिसमें गौ ग्रास तथा कौवे का ग्रास मुख्य माना जाता है. मान्यता है कि कौवा आपका संदेश पितरों तक पहुँचाने का काम करता है. भोजन में खीर का महत्व है इसलिए खीर बनानी आवश्यक है. भोजन से पहले ब्राह्मण संकल्प भी करता है. जो व्यक्ति श्राद्ध मनाता है तो उसके हाथ में जल देकर संकल्प कराया जाता है कि वह किस के लिए श्राद्ध कर रहा है. उसका नाम, कुल का नाम, गोत्र, तिथि, स्थान आदि सभी का नाम लेकर स्ंकल्प कराया जाता है. भोजन के बाद अपनी सामर्थ्यानुसार ब्राह्मण को वस्त्र तथा दक्षिणा भी दी जाती है.

यदि किसी व्यक्ति को अपने पितरों की तिथि नहीं पता है तो वह अमावस्या के दिन श्राद्ध कर सकता है और अपनी सामर्थ्यानुसार एक या एक से अधिक ब्राह्मणों को भोजन करा सकता है. कई विद्वानों का यह भी मत है कि जिनकी अकाल मृत्यु हुई है या विष से अथवा दुर्घटना के कारण मृत्यु हुई है उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन करना चाहिए.

 

श्राद्ध 2017 तिथियाँ – Shraddh Dates 2017

दिनाँक और दिन                                                        श्राद्ध तिथि (Shraddh Tithi)

6 सितंबर, दिन बुधवार पूर्णिमा तथा प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध
7 सितंबर, दिन बृहस्पतिवार द्वितीया तिथि का श्राद्ध
8 सितंबर, दिन शुक्रवार तृतीया तिथि का श्राद्ध
9 सितंबर, दिन शनिवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
10 सितंबर, दिन रविवार भरणी श्राद्ध, पंचमी तिथि का श्राद्ध
11 सितंबर, दिन सोमवार षष्ठी तिथि का श्राद्ध
12 सितंबर, दिन मंगलवार सप्तमी तिथि का श्राद्ध
13 सितंबर, दिन बुधवार अष्टमी तिथि का श्राद्ध
14 सितंबर, दिन बृहस्पतिवार नवमी तिथि का श्राद्ध
15 सितंबर, दिन शुक्रवार दशमी तिथि का श्राद्ध
16 सितंबर, दिन शनिवार एकादशी तिथि का श्राद्ध
17 सितंबर, दिन रविवार द्वादशी और त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध
18 सितंबर, दिन सोमवार विष, शस्त्र अथवा दुर्घटना में मृत्यु होने वालों का श्राद्ध और इस दिन चतुर्दशी दिन में 13:08 से आरंभ है.
19 सितंबर, दिन मंगलवार चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध और चतुर्दशी तिथि 11:53 तक रहेगी उसके बाद अमावस्या तिथि का आरंभ तो अमावस्या का श्राद्ध भी इसी दिन होगा क्योंकि श्राद्ध में दोपहर का समय लिया जाता है. सर्वपितृ श्राद्ध इसी दिन और श्राद्ध समाप्ति.

श्राद्ध वाले दिन पितृ स्तोत्र, पितृसूक्त अथवा रक्षोघ्न सूक्त का पाठ करना चाहिए.  यदि आपकी श्रद्धा है इन पाठों को करने की तब आप नीचे लिंक कर क्लिक कर सकते है :-

https://chanderprabha.com/2017/02/05/pitrustotra-at-the-time-of-shraddh/

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