पीपल वृक्ष का महत्व

पद्मपुराण के अनुसार पीपल का वृक्ष भगवान विष्णु का रुप है. इसलिए इसे धार्मिक क्षेत्र में श्रेष्ठ देव वृक्ष की पदवी मिली और इसका विधि विधान से पूजन आरंभ हुआ. हिन्दू धर्म में अनेक अवसरों पर पीपल की पूजा करने का विधान है. मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष में साक्षात…

कार्तिक माह की पाँच की एक कहानी

कार्तिक माह में बहुत सी कहानियाँ कही जाती हैं लेकिन अब जो कहानी बताई जा रही है वह एक ही कहानी की जाती है. एक ब्राह्मण और ब्राह्मणी थे, वो सात कोस दूर गंगा जमुना स्नान करने जाते थे. रोज इतनी दूर आने-जाने से ब्राह्मणी थक जाती थी. एक दिन ब्राह्मणी कहती है कि कोई…

गोविन्दाष्टकम्

चिदानन्दाकारं श्रुतिसरससारं समरसं निराधाराधारं भवजलधिपारं परगुणम्। रमाग्रीवाहारं व्रजवनविहारं हरनुतं सदा तं गोविन्दं परमसुखकन्दं भजत रे।।1।।   महाम्भोधिस्थानं स्थिरचरनिदानं दिविजपं सुधाधारापानं विहगपतियानं यमरतम्। मनोज्ञं सुज्ञानं मुनिजननिधानं ध्रुवपदं ।सदा0।।2।।   धिया धीरैर्ध्येयं श्रवणपुटपेयं यतिवरै- र्महावाक्यैर्ज्ञेयं त्रिभुवनविधेयं विधिपरम्। मनोमानामेयं सपदि हृदि नेयं नवतनुं।सदा0।।3।।   महामायाजालं विमलवनमालं मलहरं सुभालं गोपालं निहतशिशुपालं शशिमुखम्। कलातीतं कालं गतिहतमरालं मुररिपुं।सदा0।।4।।   नभोबिम्बस्फीतं निगमगणगीतं…

अच्युताष्टकम्

अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्। श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे।।1।।   अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरमं राधिकाराधितम्। इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं नन्दजं सन्दधे।।2।।   विष्णवे जिष्णवे शंखिने चक्रिणे रुक्मिणीरागिणे जानकीजानये। वल्लवीवल्लभायार्चितायात्मने कंसविध्वंसिने वंशिने ते नम:।।3।।   कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे। अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक।।4।।   राक्षसक्षोभित: सीतया शोभितो…

तुलसीदास जी कृत हनुमद्बन्दीमोचन

दोहा वीर बखानौ पवनसुत, जानत सकल जहान। धन्य-धन्य अंजनितनय, संकट हर हनुमान।।   चौपाई जय जय जय हनुमान अड़ंगी । महावीर विक्रम बजरंगी।। जय कपीश जय पवनकुमारा । जय जगवन्दन शील अगारा।। जय उद्योत अमल अविकारी । अरिमर्दन जय जय गिरिधारी।। अंजनिउदर जन्म तुम लीन्हा । जय जैकार देवतन कीन्हा।। बजी दुन्दुभी गगन गँभीरा ।…

श्राद्ध 2018

वर्ष 2018 में पितृ पक्ष श्राद्ध का आरंभ 24 सितंबर से हो रहा है. हर वर्ष आश्विन माह के आरंभ से ही श्राद्ध का आरंभ भी हो जाता है वैसे भाद्रपद माह की पूर्णिमा से ही श्राद्ध आरंभ हो जाता है क्योंकि जिन पितरों की मृत्यु तिथि पूर्णिमा है तो उनका श्राद्ध भी पूर्णिमा को…