दोहरी मस्तिष्क रेखा

हाथ में दोहरी मस्तिष्क रेखा कम ही पाई जाती है. जब जब दो अलग-अलग मस्तिष्क रेखाएँ स्पष्ट रुप से दिखाई दें तो उसके प्रभाव से जातक दो स्वभावों का हो जाता है. व्यक्ति की मानसिक प्रवृत्तियाँ दो अलग प्रवाहों में बहती हैं. व्यक्ति में मानसिक कार्य करने की असाधारण व अद्भुत मानसिक क्षमता होती है….

श्री काली चालीसा

चौपाई जय काली जगदम्ब जय, हरनि ओघ अघ पुंज। वास करहु निज दास के, निशदिन हृदय निकुंज।। जयति कपाली कालिका, कंकाली सुख दानि। कृपा करहु वरदायिनी, निज सेवक अनुमानि।। चौपाई जय जय जय काली कपाली । जय कपालिनी, जयति कराली।। शंकर प्रिया, अपर्णा, अम्बा । जय कपर्दिनी, जय जगदम्बा।। आर्या, हला, अम्बिका, माया । कात्यायनी…

मांगलिक योग और निवारण

मांगलिक योग को लेकर बहुत सी भ्राँतियाँ समाज में ज्योतिषियों द्वारा फैलाई जा रही है या यूँ कहिए कि सोशल मीडिया पर आधी-अधूरी जानकारी मांगलिक योग को लेकर भी दी जा रही है या फिर कोई व्यक्ति मांगलिक योग को लेकर कुछ लिखता भी है तो उसकी जाँच परख करने की बजाय दूसरा व्यक्ति उसे…

श्री सरस्वती चालीसा

दोहा -Doha जनक जननि पदम दुरज, निजब मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि।। पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। दुष्टजनों के पाप को, मातु तुही अब हन्तु।।   जय श्रीसकल बुद्धि बलरासी।जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी।। जय जय जय वीणाकर धारी।करती सदा सुहंस सवारी।। रूप चतुर्भुज धारी माता।सकल विश्व अन्दर…

मस्तिष्क रेखा में परिवर्तन

मस्तिष्क रेखा प्राय: अपने मार्ग में अनेकों प्रकार के परिवर्तन करती है और उसमें से रेखाएँ निकलकर ऊपर या नीचे की ओर जाती हैं. इन परिवर्तनों से भी मस्तिष्क रेखा के प्रभाव के संबंध में महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त होती है. उदाहरण के लिए यदि एक नीचे की ओर मुड़ती रेखा अपने मार्ग में किसी स्थान…

जन्म कुंडली अनुसार बंधन योग

इस लेख में बंधन योग का अर्थ किसी तरह की जेल अथवा जेल जैसी यातना वाला बंधन नहीं बताया जा रहा है. यहाँ बंधन योग का अर्थ है कि कई बार मनुष्य स्वयं को हर समय किसी ना किसी बंधन में महसूस करता रहता है जिसकी वजह से वह कभी अपने विचारो को खुल कर…

ग्रहों के यंत्र

किसी भी जातक की कुंडली में हर ग्रह की अपनी भूमिका होती है, कोई अच्छे तो कोई बुरे फल देने वाला होता है. अच्छे भावों के स्वामी यदि पीड़ित हैं तो उन्हें बली बनाने के लिए उन ग्रहों से संबंधित रत्न धारण करने की सलाह दे दी जाती है लेकिन जब बुरे भाव अथवा बुरे…

मस्तिष्क रेखा से जुड़े तथ्य

मस्तिष्क रेखा पर द्वीप चिन्हों का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है लेकिन इनका विचार करने पर यह ध्यान देना आवश्यक है कि किस आयु में किस चिन्ह का क्या प्रभाव पड़ने वाला है. वर्तमान समय में यदि द्वीप चिन्ह बना है तो यह हर रेखा को कमजोर बनाता है. द्वीप को दुर्भाग्य सूचक माना गया है….

महालक्ष्म्यष्टकम्

इन्द्र उवाच नमस्तेSस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोSस्तु ते।।1।। अर्थ – इन्द्र बोले – श्रीपीठ पर स्थित और देवताओं से पूजित होने वाली हे महामाये! तुम्हें नमस्कार है. हाथ में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली हे महाल़मि! तुम्हें प्रणाम है.   नमस्ते     गरुडारूढे     कोलासुरभयंकरि। सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोSस्तु ते।।2।। अर्थ – गरुड़…

मस्तिष्क रेखा का आरंभ स्थान

इस लेख में हम पाठकों को मस्तिष्क रेखा के आरंभ स्थान के बारे में  बताएंगे. मस्तिष्क रेखा हाथ में तीन प्रकार से आरंभ होती है. पहली प्रकार की मस्तिष्क रेखा का आरंभ जीवन रेखा के अंदर से होता है. दूसरी प्रकार की मस्तिष्क रेखा का आरंभ जीवन रेखा से जुड़कर होता है और तीसरी प्रकार…

मस्तिष्क रेखा

इस लेख में हम मस्तिष्क रेखा के विषय में चर्चा करेगें और मस्तिष्क रेखा के बारे में हस्तरेखा शास्त्री “कीरो” की विचारधारा के अनुसार पाठकों को जानकारी दी जाएगी. इस लेख में मस्तिष्क रेखा के विषय में कुछ जानकारी दी जाएगी और धीरे-धीरे कर मस्तिष्क रेखा से संबंधित सभी बातों का अध्ययन आने वाले लेखों…

स्वधा स्तोत्रम्

ब्रह्मोवाच – Brahmovach स्वधोच्चारणमात्रेण तीर्थस्नायी भवेन्नर:। मुच्यते सर्वपापेभ्यो वाजपेयफलं लभेत्।।1।। अर्थ – ब्रह्मा जी बोले – ‘स्वधा’ शब्द के उच्चारण से मानव तीर्थ स्नायी हो जाता है. वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर वाजपेय यज्ञ के फल का अधिकारी हो जाता है.   स्वधा स्वधा स्वधेत्येवं यदि वारत्रयं स्मरेत्। श्राद्धस्य फलमाप्नोति कालस्य तर्पणस्य च।।2।। अर्थ…