महादेवी के विभिन्न स्वरूप

भगवती दुर्गा – Bhagawati Durga विद्युतद्दामसमप्रभां   मृगपतिस्कन्धस्थितां  भीषणां कन्याभि:       करवालखेटविलसद्धस्ताभिरासेविताम्। हस्तैश्चक्रगदासिखेटविशिखांश्चापं     गुणं    तर्जनीं बिभ्राणामनलात्मिकां   शशिधरां  दुर्गां  त्रिनेत्रां  भजे।। अर्थ –

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श्रीपशुपत्यष्टकम्

ध्यानम् – Dhyanam ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समन्तात्स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं  वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्।।1।।   स्तोत्रम्

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श्रीविश्वनाथाष्टकम्

गंगातरंगरमणीयजटाकलापं गौरीनिरन्तरविभूषितवामभागम्। नारायणप्रियमनंगमदापहारं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम्।।1।।   वाचामगोचरमनेकगुणस्वरूपं वागीशविष्णुसुरसेवितपादपीठम्। वामेन विग्रहवरेण कलत्रवन्तं । वाराणसी0 ।।2।।   भूताधिपं              भुजगभूषणभूषितांग व्याघ्राजिनाम्बरधरं जटिलं

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सभी प्रकार के गायत्री मंत्र

परमहंस गायत्री मंत्र – Paramahansa Gayatri Mantra ऊँ परमहंसाय विद्महे महातत्त्वाय धीमहि तन्नो हंस: प्रचोदयात्।   ब्रह्मा गायत्री मंत्र –

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श्रीरामाष्टकम्

कृतार्तदेववन्दनं दिनेशवंशनन्दनम्। सुशोभिभालचन्दनं     नमामि   राममीश्वरम्।।1।।   मुनीन्द्रयज्ञकारकं        शिलाविपत्तिहारकम्। महाधनुर्विदारकं      नमामि   राममीश्वरम्।।2।।   स्वतातवाक्यकारिणं   तपोवने     विहारिणम्। करे    सुचापधारिणं    नमामि   राममीश्वरम्।।3।।  

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वेदसारशिवस्तव:

पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य    कृत्तिं    वसानं    वरेण्यम्। जटाजूटमध्ये स्फुरद्गांगवारिं महादेवमेकं स्मरामि     स्मरारिम्।।1।।   महेशं सुरेशं सुरारार्तिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यंगभूषम्।

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