सूर्य द्वादशनाम स्तोत्र

आदित्यं प्रथमं नाम द्वितीयं तु दिवाकर:। तृतीयं भास्कर: प्रोक्तं चतुर्थं तु प्रभाकर:।।1।।   पंचमं तु सहस्त्रांशु षष्ठं त्रैलोक्यलोचन:। सप्तमं हरिदश्वश्य अष्टमं च विभावसु:।।2।।   नवमं दिनकर: प्रोक्तों दशमं द्वादशात्मक:। एकादशं त्रयोमूर्ति द्वादशं सूर्य एव च।।3।।   यदि किसी जातक(Native) की जन्म कुण्डली में सूर्य की महादशा चली हुई है अथवा सूर्य की अन्तर्दशा चली हुई…

शिवप्रात:स्मरणस्तोत्रम्

प्रात: स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं गंगाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम्। खट्वांगशूलवरदाभयहसतमीशं   संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्।।1।।   प्रातर्नमामि गिरिशं गिरिजार्द्धदेहं सर्गस्थितिप्रलयकारनमादिदेवम्। विश्वेश्वरं विजितविश्वमनोSभिरामं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्।।2।।   प्रातर्भजामि शिवमेकमनन्तमाद्यं वेदान्तवेद्यमनघं पुरुषं महान्तम्। नामादिभेदरहितं   च   विकारशून्यं   संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम्।।3।।   प्रात: समुत्थाय शिवं विचिन्त्य श्लोकत्रयं येSनुदिनं पठन्ति ते दु:खजातं बहुजनमसण्जितं हित्वा पदं यान्ति पदेव शम्भो:।।4।। भगवान शिव के इस स्तोत्र का जो भी व्यक्ति सुबह जाप करता है,…

खण्डग्रास चन्द्रग्रहण ⅞ अगस्त 2017

वर्ष 2017 में भारतवर्ष में केवल एक ही ग्रहण दिखाई देगा. ये चन्द्रग्रहण है जो ⅞ अगस्त(श्रावण माह की पूर्णिमा) की मध्य रात्रि अर्थात सोमवार-मंगलवार की रात को पूरे भारतवर्ष में खण्डग्रास रूप में दिखाई देगा. इस ग्रहण का स्पर्श तथा मोक्ष आदि का समय भारतीय समयानुसार निम्न है :- ग्रहण स्पर्श  –  22घं.   52मि….

आरती श्री सरस्वती जी

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण, वैभवशालिनि, त्रिभुवन विख्याता ।।जय।।   चन्द्रवदनि, पद्मासिनि द्युति मंगलकारी। सोहे हंस-सवारी, अतुल तेजधारी।।जय।।   बायें कर में वीणा, दूजे कर माला। शीश मुकुट-मणि सोहे, गले मोतियन माला।।जय।। देव शरण में आये, उनका उद्धार किया। पैठि मंथरा दासी, असुर-संहार किया।।जय।।   वेद-ज्ञान-प्रदायिनि, बुद्धि-प्रकाश करो। मोहाज्ञान तिमिर का सत्वर…

आरती श्री जानकी जी

आरती श्रीजनक दुलारी की। सीताजी रघुबर प्यारी की – टेक   जगत-जननि जग की विस्तारिणि, नित्य सत्य साकेत-विहारिणि, परम दयामयि दीनोद्धारिणि, मैया भक्तन-हितकारी की सीता जी……   सती शिरोमणि पति-हित-कारिणि, पति-सेवा हित वन-वन चारिणि, पति-हित पति-वियोग-स्वीकारिणि, त्याग-धर्म-मूरति-धारी की सीता जी……..   विमल-कीर्ति सब लोकन छाई, नाम लेत पावन मति आई, सुमिरत कटत कष्ट दुखदाई, शरणागत-जन-भय-हारी…

कात्यायनी स्तुति:

नमस्ते   त्रिजगद्वन्द्ये   संग्रामे    जयदायिनि। प्रसीद   विजयं   देहि   कात्यायनि  नमोSस्तु ते ।।1।।   सर्वशक्तिमये दुष्टरिपुनिग्रहकारिणि। दुष्टजृम्भिणि   संग्रामे   जयं   देहि  नमोSस्तु ते।।2।।   त्वमेका   परमा   शक्ति:   सर्वभूतेष्ववस्थिता। दुष्टं  संहर  संग्रामे  जयं देहि      नमोSस्तु ते।।3।।   रणप्रिये      रक्तभक्षे       मांसभक्षणकारिणि। प्रपन्नार्तिहरे  युद्धे   जयं  देहि  नमोSस्तु ते।।4।।   खट्वांगासिकरे मुण्डमालाद्योतितविग्रहे। ये त्वां  स्मरन्ति  दुर्गेषु  तेषां दु:खहरा भव।।5।।   त्वत्पादपंकजाद्दैन्यं   नमस्ते…

गंगा दशहरा स्तोत्रम्

ऊँ  नम:  शिवायै  गंगायै  शिवदायै  नमो नम:। नमस्ते विष्णुरूपिण्यै ब्रह्ममूर्त्यै नमोSस्तु ते।।1।। नमस्ते   रुद्ररूपिण्यै   शांकर्यै   ते  नमो  नम:। सर्वदेवस्वरूपिण्यै      नमो        भेषजमूर्तये।।2।। सर्वस्य सर्वव्याधीनां भिषक्छ्रेष्ठ्यै नमोSस्तु ते। स्थास्नुजंगमसम्भूतविषहन्त्र्यै     नमोSस्तु ते।।3।। संसारविषनाशिन्यै     जीवनायै    नमोSस्तु ते। तापत्रितयसंहन्त्र्यै   प्राणेश्यै   ते   नमोSस्तु ते।।4।। शान्तिसन्तानकारिण्यै    नमस्ते   शुद्धमूर्तये। सर्वसंशुद्धिकारिण्यै       नम:    पापारिमूर्तये।।5।। भुक्तिमुक्तिप्रदायिन्यै   भद्रदायै  नमो  नम:। भोगोपभोगदायिन्यै  भोगवत्यै   नमोSस्तु ते।।6।। मन्दाकिन्यै नमस्तेSस्तु स्वर्गदायै…

श्रीविन्ध्येश्वरी स्तोत्रम्

जो भी व्यक्ति श्रद्धा तथा विश्वास के साथ नियमित रुप से 9 दिन तक इस स्तोत्र का जाप करता है उसे जीवन में अपार सफलता प्राप्त होती है. धन-धान्य, सुख-समृद्धि, वैभव, पराक्रम तथा सौभाग्य में वृद्धि होती है. निशुम्भशुम्भमर्दिनीं प्रचण्डमुण्डखण्डिनीम्। वने  रणे  प्रकाशिनीं   भजामि   विन्ध्यवासिनीम्।।1। अर्थ – शुम्भ तथा निशुम्भ का संहार करने वाली, चण्ड…

भद्रकालीस्तोत्रम्

(Kali Stotram For Success) ब्रह्मविष्णु ऊचतु: – Brahmavishnu Uchatuh नमामि       त्वां    विश्वकर्त्रीं    परेशीं नित्यामाद्यां सत्यविज्ञानरूपाम्। वाचातीतां निर्गुणां चातिसूक्ष्मां ज्ञानातीतां शुद्धविज्ञानगम्याम्।।1।। अर्थ – ब्रह्मा और विष्णु बोले – सर्वसृष्टिकारिणी, परमेश्वरी, सत्यविज्ञानरूपा, नित्या, आद्याशक्ति! आपको हम प्रणाम करते हैं. आप वाणी से परे हैं, निर्गुण और अति सूक्ष्म हैं, ज्ञान से परे और शुद्ध विज्ञान से प्राप्य…

महादेवी के विभिन्न स्वरूप

भगवती दुर्गा – Bhagawati Durga विद्युतद्दामसमप्रभां   मृगपतिस्कन्धस्थितां  भीषणां कन्याभि:       करवालखेटविलसद्धस्ताभिरासेविताम्। हस्तैश्चक्रगदासिखेटविशिखांश्चापं     गुणं    तर्जनीं बिभ्राणामनलात्मिकां   शशिधरां  दुर्गां  त्रिनेत्रां  भजे।। अर्थ – मैं तीन नेत्रों वाली दुर्गा देवी का ध्यान करता हूँ, उनके श्री अंगों की प्रभा बिजली के समान है. वे सिंह के कन्धे पर बैठी हुई भयंकर प्रतीत होती हैं. हाथों में तलवार और ढाल…

देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्

न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथा:। न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम्।।1।।   विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया विधेयाशक्यत्वात्तव  चरणयोर्या च्युतिरभूत्। तदेतत्क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति।।2।।   पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहव: सन्ति सरला: परं  तेषां  मध्ये…

श्रीपशुपत्यष्टकम्

ध्यानम् – Dhyanam ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समन्तात्स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं  वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्।।1।।   स्तोत्रम् – Stotram पशुपतिं द्युतिं धरणीपतिं भुजगलोकपतिं च सतीपतिम्। प्रणतभक्तजनार्तिहरं परं भजत रे मनुजा गिरिजापतिम्।।1।।   न जनको जननी न च सोदरो न तनयो न च भूरिबलं कुलम्। अवति कोSपि न कालवशं गतं भजत रे मनुजा…