गंगाष्टकम्

पाठकों की सुविधा के लिए यहाँ हम दो गंगाष्टकम का वर्णन कर रहे हैं – पहला महर्षि वाल्मिकी द्वारा रचित और दूसरा श्रीशंकराचार्य जी द्वारा रचित है.   मात:         शैलसुतासपत्नि     वसुधाश्रृंगारहारावलि स्वर्गारोहणवैजयन्ति    भवतीं    भागीरथि    प्रार्थये । त्वत्तीरे  वसतस्त्वदम्बु  पिबतस्त्वद्वीचिषु प्रेड़्खत – स्त्वन्नाम स्मरतस्त्वदर्पितदृश:  स्यान्मे शरीरव्यय:।।1।।   त्वत्तीरे    तरुकोटरान्तरगतो    गंगे    विहंगो    वरं त्वन्नीरे नरकान्तकारिणि वरं मत्स्योSथवा…

श्री कृष्ण 108 नामावली

1) ऊँ श्री अनन्ताय नम: 2) ऊँ श्री आत्मवते नम: 3) ऊँ श्री अद्भुताय नम: 4) ऊँ श्री अव्यक्ताय नम: 5) ऊँ श्री अनिरुद्ध पितामहाय नम: 6) ऊँ श्री आत्मज्ञान निधये नम: 7) ऊँ श्री आद्यपते नम: 8) ऊँ श्री कालिन्दी पतये नम: 9) ऊँ श्री कंसारये नम: 10) ऊँ श्री कुब्जावकृत्य निमेवित्रे नम: 11)…

श्री रामचन्द्र जी के 108 नाम

1) ऊँ श्री राजीव लोचनाय नम: 2) ऊँ श्री रामाया नम: 3) ऊँ श्री रामभद्राय नम: 4) ऊँ श्री राजेन्द्राय नम: 5) ऊँ श्री जानकी पतये नम: 6) ऊँ श्री परमेश्वराय नम: 7) ऊँ श्री जनार्दनाय नम: 8) ऊँ श्री शत्रुजिते नम: 9) ऊँ श्री सर्वज्ञाय नम: 10) ऊँ श्री बालिमर्दनाय नम: 11) ऊँ श्री…

श्रीनारायणाष्टकम्

वात्सल्यादभयप्रदानसमयादार्तार्तिनिर्वापणा – दौदार्यादघशोषणादगणितश्रेय:पदप्रापणात्                । सेव्य:  श्रीपतिरेक  एव  जगतामेतेSभवन्साक्षिण: प्रह्लादश्च  विभीषण्श्च  करिराट् पांचाल्यहल्या ध्रुव: ।।1।।   प्रह्लादस्ति  यदीश्वरो  वद  हरि:  सर्वत्र  मे दर्शय स्तम्भे   चैवमिति  ब्रुवन्तमसुरं  तत्राविरासीद्धरि: । वक्षस्तस्य    विदारयन्निजनखैर्वात्सल्यमापादय – न्नार्तत्राणपरायण:  स  भगवान्नारायणो मे गति: ।।2।।   श्रीरामात्र  विभीषणोSयमनघो  रक्षोभयादागत: सुग्रीवानय  पालयैनमधुना   पौलस्त्यमेवागतम्। इत्युक्त्वाभयमस्य सर्वविदितं यो राघवो दत्तवानार्त0 ।।3।।   नक्रग्रस्तपदं  समुद्धतकरं  ब्रह्मादयो  भो  सुरा:…

गोविन्द दामोदर स्तोत्रम्

अग्रे कुरूणामथ दु:शासनेनाहृतवस्त्रकेशा । कृष्णा   तदाक्रोशदनन्यनाथा    गोविन्द    दामोदर   माधवेति ।।1।।   श्रीकृष्ण  विष्णो  मधुकैटभारे  भक्तानुकम्पिन्  भगवन्  मुरारे । त्रायस्व   मां   केशव   लोकनाथ   गोविन्द   दामोदर  माधवेति ।।2।।   विक्रेतुकामाखिलगोपकन्या मुरारिपादार्पितचित्तवृत्ति:। दध्यादिकं    मोहवशादवोचद्    गोविन्द   दामोदर   माधवेति ।।3।।   उलूखले   सम्भृततण्डुलांश्च   संघट्टयन्त्यो  मुसलै:  प्रमुग्धा: । गायन्ति  गोप्यो  जनितानुरागा  गोविन्द  दामोदर माधवेति ।।4।।   काचित्कराम्भोजपुटे  निषण्णं  क्रीडाशुकं  किंशुकरक्ततुण्डम् ।…

भगवत्स्तुति:

भीष्म उवाच – Bhishma Uvach इति  मतिरुपकल्पिता वितृष्णा भगवति सात्वतपुंगवे विभूम्नि । स्वसुखमुपगते क्वचिद्विहर्तुं   प्रकृतिमुपेयुषि   यद्भवप्रवाह: ।।1।।   त्रिभुवनकमनं तमालवर्णं     रविकरगौरवराम्बरं      दधाने । वपुरलककुलावृताननाब्जं    विजयसखे  रतिरस्तु मेSनवद्या ।।2।।   युधि  तुरगरजोविधूम्रविष्वक्-कचलुलितश्रमवार्यलड्कृतास्ये । मम निशितशरैर्विभिद्यमान-त्वचि विलसत्कवचेSस्तु कृष्ण आत्मा।।3।।   सपदि  सखिवचो  निशम्य  मध्ये निजपरयोर्बलयो  रथं  निवेश्य । स्थितवति  परसैनिकायुरक्ष्णा  हृतवति  पार्थसखे  रतिर्ममास्तु ।।4।।   व्यवहितपृतनामुखं  निरीक्ष्य…

शिव 108 नामावली

1) ऊँ श्री सर्वभूतहराय नम: 2) ऊँ श्री शास्वताय नम: 3) ऊँ श्री शमशानवासिने नम: 4) ऊँ श्री तपस्वने नम: 5) ऊँ श्री महारुपाय नम: 6) ऊँ श्री वृषरुपाय नम: 7) ऊँ श्री स्वयम्भूभूताय नम: 8) ऊँ श्री विशालाक्षाय नम: 9) ऊँ श्री घोरतपसे नम: 10) ऊँ श्री महावलाय नम: 11) ऊँ श्री नीलकण्ठाय नम:…

विष्णु जी 108 नामावली

1) ऊँ श्री विष्णवे नम: 2) ऊँ श्री परमात्मने नम: 3) ऊँ श्री विराट पुरुषाय नम: 4) ऊँ श्री क्षेत्र क्षेत्राज्ञाय नम: 5) ऊँ श्री केशवाय नम: 6) ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नम: 7) ऊँ श्री ईश्वराय नम: 8) ऊँ श्री हृषीकेशाय नम: 9) ऊँ श्री पद्मनाभाय नम: 10) ऊँ श्री विश्वकर्मणे नम: 11) ऊँ श्री…

श्री गणपति 108 नामावली

1) ऊँ श्री गणेश्वराय नम: 2) ऊँ श्री गणाध्यक्षाय नम: 3) ऊँ श्री गणप्रियाय नम: 4) ऊँ श्री गणनाथाय नम: 5) ऊँ श्री गणेशाय नम: 6) ऊँ श्री गणपतये नम: 7) ऊँ श्री गणेधीशाय नम: 8) ऊँ श्री गणप्रभवे नम: 9) ऊँ श्री गणस्तुताय नम: 10) ऊँ श्री गुणाप्रियाय नम: 11) ऊँ श्री गौणशरीराय नम:…

आनन्दलहरी

भवानि स्तोतुं त्वां प्रभवति चतुर्भिनं वदनै: प्रजानामीशानस्त्रिपुरमथन: पंचभिरपि। न  षड्भि: सेनानीर्दशशतमुखैरप्यहिपति- स्तदान्येषां केषां कथय कथमस्मिन्नवसर:।।1।।   घृतक्षीरद्राक्षामधुमधुरिमा कैरपि       पदै- र्विशिष्यानाख्येयो भवति रसनामात्रविषय:। तथा ते सौन्दर्य परमशिवदृड्मात्रविषय: कथकांरं     ब्रूम:    सकलनिगमागोचरगुणे।।2।।   मुखे   ते   ताम्बूलं   नयनयुगले   कज्जलकला ललाटे काश्मीरं विलसति गले मौक्तिकलता। स्फुरत्कांची  शाटी  पृथुकटितटे  हाटकमयी भजामि त्वां गौरीं नगपतिकिशोरीमविरतम् ।।3।।   विराजन्मन्दारद्रुमकुसुमहारस्तनतटी नदद्वीणानादश्रवणविलसत्कुण्डलगुणा। नतांगी  मातंगीरुचिरगतिभंगी  भगवती…

षट्पदी स्तोत्रं

अविनयमपनय विष्णो दमय मन: शमय विषयमृगतृष्णाम्। भूतदयां     विस्तारय      तारय             संसारसागरत:।।1।। अर्थ – हे विष्णु भगवान! मेरी उद्दण्डता दूर कीजिए, मेरे मन का दमन कीजिए और विषयों की मृगतृष्णा को शान्त कर दीजिए, प्राणियों के प्रति मेरा दयाभाव बढ़ाइए और इस संसार-समुद्र से मुझे पार लागाइए.   दिव्यधुनीमकरन्दे              परिमलपरिभोगसच्चिदानन्दे। श्रीपतिपदारविन्दे      भवभयखेदच्छिदे               वन्दे।।2।। अर्थ – भगवान लक्ष्मीपति…

पार्वती स्तुति:

ब्रह्मादय ऊचु: त्वं माता जगतां पितापि च हर: सर्वे इमे बालका-स्तस्मात्त्वच्छिशुभावत: सुरगणे नास्त्येव ते सम्भ्रम:। मातस्त्वं शिवसुन्दरि त्रिजगतां लज्जास्वरूपा यत-स्तस्मात्त्वं जय देवि रक्ष धरणीं गौरि प्रसीदस्व न:।।1।।   त्वमात्मा   त्वं  ब्रह्म      त्रिगुणरहितं   विश्वजननि  स्वयं   भूत्वा   योषित्पुरुषविषयाहो    जगति  च। करोष्येवं    क्रीडां     स्वगुणवशतस्ते     च    जननीं वदन्ति  त्वां  लोका:  स्मरहरवरस्वामिरमणीम्।।2।।   त्वं स्वेच्छावशत:  कदा  प्रतिभवस्यंशेन शम्भु: पुमा-न्स्त्रीरूपेण शिवे…