चित्रा नक्षत्र और व्यवसाय

चित्रा नक्षत्र का विस्तार कन्या राशि में 23 अंश(Degree) 20 कला(Minute) से आरंभ होकर तुला राशि में 6 अंश 40 कला तक रहता है. चित्रा नक्षत्र का विस्तार दो राशियों कन्या व तुला तक रहता है इसलिए आजीविका के संबंध में भी इन दोनों राशियों के गुणों का समावेश देखा जा सकता है. चित्रा नक्षत्र…

हस्त नक्षत्र और व्यवसाय

हस्त नक्षत्र कन्या राशि में 10 अंश(Degree) से 23 अंश 20 कला(Minute) तक रहता है. इस नक्षत्र के अधिकार क्षेत्र में निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं :- हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है तो कला से संबंधित व्यवसाय इस नक्षत्र के अन्तर्गत आते हैं जैसे शिल्पी अथवा दस्तकार, सौन्दर्य प्रसाधन निर्माता, आन्तरिक गृह सज्जा, हाथ की…

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ

ऊँ नमश्चण्डिकायै नम: अथ श्री दुर्गा सप्तशती भाषा पहला अध्याय – Chapter First – Durga Saptashati (महर्षि ऋषि का राजा सुरथ और समाधि को देवी की महिमा बताना) महर्षि मार्कण्डेय बोले – सूर्य के पुत्र सावर्णि की उत्पत्ति की कथा विस्तारपूर्वक कहता हूँ सुनो, सावर्णि महामाया की कृपा से जिस प्रकार मन्वन्तर के स्वामी हुए,…

उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और व्यवसाय

उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सिंह राशि(Leo Sign) में 26 अंश(Degree) 40 कला(Minute) से आरंभ होता है और कन्या राशि(Virgo Sign) में 10 अंश तक विस्तारित रहता है. उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के अन्तर्गत निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं:- इस नक्षत्र के अधिकार में सृजनात्मक कलाकार, संगीतज्ञ, मनोरंजन करने वाला, सुपर स्टार, प्रबन्धक, नेता, लोकप्रिय खिलाड़ी, वरिष्ठ अधिकारी, सांसद या मंत्री,…

पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और व्यवसाय

  पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का सिंह राशि में विस्तार 13 अंश(Degree) 20 कला(Minute) से लेकर 26 अंश 40 कला तक माना गया है. इस नक्षत्र के अधिकार में निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं :- यह नक्षत्र सिंह राशि में पड़ता है इसलिए सरकारी कर्मचारी, उच्चाधिकारी, प्रबंधक, राजदूत इस नक्षत्र के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र…

मघा नक्षत्र और व्यवसाय

मघा नक्षत्र का सिंह राशि(Leo Sign) में 0 अंश से लेकर 13 अंश(Degree) 20 कला(Minute) तक विस्तार रहता है. नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु होता है. मघा नक्षत्र के अन्तर्गत निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं :- सिंह राशि के आरंभ से ही मघा नक्षत्र का विस्तार आरंभ होता है तो सिंह राशि के कुछ गुणों का…

विन्ध्येश्वरी चालीसा

दोहा – नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदम्ब । सन्तजनों के काज में, करती नहीं विलम्ब ।। जय जय जय विन्ध्याचल रानी। आदिशक्ति जगविदित भवानी। सिंहवाहिनी जै जगमाता । जै जै जै त्रिभुवन सुखदाता । कष्ट निवारण जै जगदेवी । जै जै सन्त असुर सुर सेवी । महिमा अमित अपार तुम्हारी । शेष सहस मुख…

हनुमानबाहुक

  संवत 1664 विक्रमाब्द के लगभग गोस्वामी तुलसीदास जी की बाहुओं में वात व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई. फोड़े-फुंसियों के कारण सारा शरीर वेदना का स्थान बन गया. हर प्रकार की औषधि की गई, यंत्र, मंत्र तथा टोटके आदि के भी उपाय किए गए लेकिन रोग कम नहीं हुआ उलटे और बढ़ने लगा. दिनोंदिन…

श्रीकनकधारास्तोत्रम् – Kanakdhara Stotram – 22 Slokas in Praise of Goddess Lakshmi

अंगं हरे: पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम् अंगीकृताखिलविभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया: ।।1।।   मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारे: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि । माला दृशोर्मधुकरीव महोत्पले या सा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवाया:।।2।।   विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्ष – मानन्दहेतुरधिकं मुरविद्विषोsपि। ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्ध – मिन्दीवरोदरसहोदरमिन्दिराया:।।3।।   आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्द – मानन्दकन्दमनिमेषमनंगतन्त्रम् आकेकरस्थितकनीनिकपक्ष्मनेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगशयांनाया:।।4।।   बाह्वन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभे या हारावलीव हरिनीलमयी…

श्रीगणेशपंचरत्नस्तोत्रम्

  मुदा करात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंकसकं विलासिलोकरंजकम् अनायकैकनायकं नमामि तं विनायम् नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायम्   नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम् सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरं महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम्   समस्तलोकशंकरं निरस्तदैत्यकुंजरं दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम् कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करं मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम्   अकिंचनार्तिमार्जनं चिरन्तनोक्तिभाजनं पुरारिपूर्वनन्दनं सुरारिगर्वचर्वणम् प्रपंचनाशभीषणं धनंजयादिभूषणं कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम्   नितान्तकान्तदन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मज –…

सूर्य दशाफल

सूर्य महादशा के फल – Results Of Sun Mahadasha यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य की महादशा आरंभ हो गई है तब उसे इस समय में गोपनीय विधि से धनागम हो सकता है लेकिन अग्नि अथवा पशु से भय भी बना रह सकता है. उदर (पेट) तथा दाँतों संबंधी रोग जकड़ सकते हैं. पत्नी…