कार्य बाधा दूर करने के उपाय

जीवन में कई बार समस्याओं का सामना कभी ना कभी हर व्यक्ति को करना पड़ता है. समस्याएँ तो जीवन में आती रहती हैं लेकिन जब कोई समस्या नासूर बन जाए तब व्यक्ति काफी मानसिक दबाव में फंस जाता है. कुछ ऎसे व्यक्ति हैं जिन्हें समस्या तो आती है पर उसका समाधान भी शीघ्र हो जाता…

श्रीदेव्या: प्रात:स्मरणम्

प्रात: स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहारभूषाम् । दिव्यायुधोर्जितसुनीलसहस्त्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम् ।।1।। हिन्दी अनुवाद : जिनकी अंगकान्ति शारदीय चन्द्रमा की किरण के समान उज्जवल है, जो उत्तम रत्नद्वारा निर्मित मकराकृति कुण्डल और हार से विभूषित हैं, जिनके गहरे नीले हजारों हाथ दिव्यायुधों से सम्पन्न हैं तथा जिनके चरण लाल कमल की कान्ति-सदृश अरुण हैं, ऎसी आप परमेश्वरी…

श्रीगणेशप्रात: स्मरणस्तोत्रम्

प्रात: स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं सिन्दूरपूरपरिशोभितगण्डयुग्मम् । उद्दण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्ड – माखण्डलादिसुरनायकवृन्दवन्द्यम् ।।1।। हिन्दी अनुवाद : जो इन्द्र आदि देवेश्वरों के समूह से वन्दनीय हैं, अनाथों के बन्धु हैं, जिनके युगल कपोल सिन्दूर राशि से अनुरंजित हैं, जो उद्दण्ड(प्रबल) विघ्नों का खण्डन करने के लिए प्रचण्ड दण्डस्वरुप हैं, उन श्रीगणेश जी का मैं प्रात:काल स्मरण करता/करती हूँ.   प्रातर्नमामि…

मीन राशि और प्रेम संबंध

आपकी जन्म राशि मीन है और इस राशि को जलतत्व राशि की श्रेणी में रखा गया है. इस राशि का चिन्ह दो मछलियाँ है जो परस्पर एक-दूसरे की पूँछ को देख रही हैं अर्थात दोनों गोलाई में घूमी हुई है और उनका मुख दूसरे की पूँछ की ओर है. स्वभाव से इस राशि को द्विस्वभाव…

कुंभ राशि और प्रेम संबंध

आपकी जन्म राशि कुंभ है और इस राशि को वायु तत्व राशि के अन्तर्गत रखा गया है. स्वभाव से इस राशि को स्थिर स्वभाव की राशि माना गया है. राशि के चिन्ह में एक व्यक्ति को दिखाया गया है जिसके कंधे पर कुंभ है और उस कुंभ को व्यक्ति ने पकड़ रखा है. कुंभ के…

मकर राशि और प्रेम संबंध

आपकी जन्म राशि मकर है और यह राशि पृथ्वी तत्व राशियों की श्रेणी में आती है. इस राशि का स्वभाव चर माना गया है अर्थात सदा चलायमान रहना. इस राशि का जो चिन्ह है उसका मुख बकरी जैसा तो पूँछ मछली जैसी है. पृथ्वी तत्व राशि होने से आप एक व्यवहारिक व्यक्ति हैं जिससे आपको…

धनु राशिे और प्रेम संबंध

आपकी जन्म राशि धनु है और इस राशि को अग्नि तत्व राशियों की श्रेणी में रखा गया है. यह स्वभाव से द्विस्वभाव राशियों के अन्तर्गत आती है. इसका चिन्ह घोड़े पर सवार एक युवक है जिसके हाथ में धनुष है और युवक ने धनुष को खींचा हुआ है जैसे किसी का शिकार करने वाला है….

श्री सत्यनारायण भगवान की कथा

पहला अध्याय – First Chapter Of Satyanarayan Bagwan Katha एक समय की बात है नैषिरण्य तीर्थ में शौनिकादि, अठ्ठासी हजार ऋषियों ने श्री सूतजी से पूछा हे प्रभु! इस कलियुग में वेद विद्या रहित मनुष्यों को प्रभु भक्ति किस प्रकार मिल सकती है? तथा उनका उद्धार कैसे होगा? हे मुनि श्रेष्ठ ! कोई ऎसा तप…

शनिवार व्रत

शनिवार का व्रत शनि महाराज को प्रसन्न करने के लिए रखा जाता है. जिनकी जन्म कुंडली में शनि की साढ़ेसाती चल रही है या शनि की महादशा चल रही है अथवा शनि शुभ होकर अशुभ स्थिति में है तब इसका व्रत किया जाना चाहिए. शनि महाराज अपनी दशा/अन्तर्दशा में मेहनत कराकर ही फल देते हैं….

शुक्रवार का व्रत

शुक्रवार के व्रत में कथा कहते हुए अथवा कथा सुनते हुए हाथ में थोड़ा गुड़ व भुना हुआ चना रखते हैं और कथा सुनते हुए सभी लोग बीच-बीच में संतोषी माँ की जय बोलते रहें. कथा खतम होने पर हाथ में लिया गुड़-चना गाय को खिला दिया जाता है. संतोषी माता के व्रत में एक…