माँ दुर्गा के नौ रुपों की कथा

शास्त्रानुसार माँ दुर्गा के नौ रुप कहे गए हैं और नवरात्र के प्रत्येक दिन माँ का ही एक रुप होता है. माता के इन रुपों के पीछे क्या कहानी हैं उसका वर्णन इस लेख के द्वारा पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.   महाकाली – Mahakali प्राचीन समय की बात है संसार…

आश्विन माह के व्रत तथा त्यौहार

आश्विन माह की गणेश जी की कथा – Story Of Lord Ganesha In Ashvin Month एक समय की बात है, मथुरा नगरी में कंस राजा का एक रिश्तेदार रहता था. उसका नाम वाणासुर था और उसकी एक पुत्री थी जिसका नाम ऊषा था. ऊषा बहुत ही रूपवान थी. उसके पिता वाणासुर ने उसके रहने के…

भाद्रपद माह के व्रत तथा त्यौहार – भाग 4

राधाष्टमी व्रत अथवा महालक्ष्मी पूजन – Radhashtami Fast Or Mahalakshmi Pujan भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा जी का जन्म हुआ था. इसलिए इस दिन को राधाष्टमी के रुप में मनाया जाता है. इस दिन राधा व कृष्ण की पूजा की जाती है. राधाजी को पंचामृत से स्नान कराकर उनका श्रृंगार किया…

भाद्रपद माह के व्रत तथा त्यौहार – भाग 3

गणेश चतुर्थी – Ganesha Chaturthi भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के नाम से मनाया जाता है. इस दिन सुबह सवेरे उठ कर स्नानादि से निवृत होकर सोने, चाँदी, ताँबे, मिट्टी अथवा गोबर के गणेश जी की मूर्त्ति बनाकर उनकी पूजा करनी चाहिए. पूजा के बाद इक्कीस व्यंजनों का भोग लगाना…

भाद्रपद माह के व्रत तथा त्यौहार – भाग 2

अजा (प्रबोधिनी) एकादशी – Aja Or Prabodhini Ekadashi  प्रबोधिनी अथवा अजा एकादशी को भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है. एक एकादशी को अजा व प्रबोधिनी तो कहा ही जाता है लेकिन कई जगहों पर इसे जया अथवा कामिनी एकादशी भी कहा गया है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की…

भाद्रपद माह के व्रत तथा त्यौहार – भाग 1

भाद्रपद माह की गणेश जी की कथा – Story Of Lord Ganesha In Bhadrapad Month पुराने समय में बहुत प्रतापी राजा राज्य करते थे. उनका नाम नल था और उनकी पत्नी अत्यंत रुपवती थी. उसका नाम दमयन्ती था. राजा बहुत ही अच्छे से प्रजा का पालन करते थे इसीलिए उनकी प्रजा भी सुखी थी. किसी…

श्रावण माह के व्रत तथा त्यौहार

श्रावण माह में गणेश जी की कथा – Story Of Lord Ganesha in Shravan Month जब देवों के भी देव महादेव जी की पत्नी जगतमाता ने अपने पिता दक्ष के यज्ञकुण्ड में अपने शरीर की आहुति दे दी तो अगले जन्म में उन्होंने पर्वतराज हिमालय की पत्नी मैना के गर्भ से जन्म लिया. वहाँ वे…

प्रेम अथवा अंतर्जातीय विवाह के ज्योतिषीय योग – भाग 3

इससे पहले हम भाग 1 और भाग 2 में प्रेम अथवा अन्तर्जातीय विवाह के योगों के विषय में चर्चा कर चुके हैं. इस भाग में हम चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कुछ और योगों की बात करेगें जिनके कुंडली में बनने पर मान्यताओं से हटकर विवाह होता है. यदि किसी जन्म कुंडली में पाप ग्रहों…

प्रेम अथवा अंतर्जातीय विवाह के ज्योतिषीय योग – भाग 2

भाग एक में कई तरह के ज्योतिषीय योगों की चर्चा की गई हैं जिनके जन्म कुंडली में होने पर जातक का प्रेम विवाह होता है अथवा अन्तर्जातीय विवाह के योग भी बनते हैं. इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए इस दूसरे भाग में भी उन्हीं योगों की चर्चा को आगे बढ़ाया जाएगा. जातक की जन्म…

प्रेम विवाह अथवा अंतर्जातीय विवाह के ज्योतिषीय योग – भाग 1

वर्तमान समय में युवक-युवतियाँ जहाँ हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहें है वहाँ एक-दूसरे के प्रति आकर्षण होना भी आम बात हो गई है और यह आकर्षण कब प्रेम का रुप ले लेता है पता ही नहीं चलता. ऎसे में प्रेम विवाह होना कोई आश्चर्य की बात नहीं रह गई है….

भारतीय ज्योतिष में विवाह के प्रकार

  प्राचीन काल के विद्वानों ने आठ प्रकार के विवाहों का उल्लेख किया है जो निम्नलिखित प्रकार के होते थे. इनमें से कई विवाह तो अब समाप्त हो चुके हैं लेकिन फिर भी हम सभी आठों प्रकार के विवाह का संक्षिप्त वर्णन कर रहे हैं.   1) ब्रह्म विवाह – Brahma Marriage यह विवाह प्राचीन…

रत्न – Gemstones

हर व्यक्ति को कभी ना कभी समस्याओं से होकर गुजरना ही पड़ता है और कई बार समस्याएँ इतनी गंभीर हो जाती हैं व्यक्ति शारीरिक कष्ट के साथ मानसिक तनाव का भी शिकार हो जाता है. कई बार जन्म कुंडली में ऎसी अशुभ दशाएँ आ जाती हैं जिनमें व्यक्ति घिर सा जाता है और कोई रास्ता…