रोहिणी नक्षत्र

रोहिणी नक्षत्र वृष राशि में 10 अंश से 23 अंश 20 कला तक रहता है. इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह चन्द्रमा है. रोहिणी नक्षत्र में वे सभी कार्य आते हैं जिनमें खाद्य पदार्थों को उगाकर, उन्हें विकसित तथा संशोधित करके जातक अपनी आजीविका चलाता है. पेड़ – पौधों से संबंधित वैज्ञानिक व शोधकर्ता आदि, वनस्पतियों…

बरुथिनी एकादशी

बरुथिनी एकादशी व्रत माहात्म्य – Varuthini Ekadashi Vrat Importance यह व्रत वैशाख माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है. इस व्रत को करने से सुख तथा सौभाग्य में वृद्धि होती है. इस व्रत का जो फल मिलता है, वह ब्राह्मण को दान देने, करोड़ो वर्षों की तपस्या अथवा कन्यादान करने से भी…

कृतिका नक्षत्र

कृतिका नक्षत्र का विस्तार मेष राशि में 26 अंश 40 कला से आगे वृष राशि  में 10 अंश तक होता है. कृतिका नक्षत्र का स्वामी ग्रह सूर्य है. सेना, पुलिस या सुरक्षा बल मे नौकरी, अग्नि शमन अधिकारी, विस्फोट विशेषज्ञ व आपदा प्रबन्धक हर प्रकार के पुनर्वास कार्यौं से जुड़े व्यवसाय इस नक्षत्र के अधिकार…

वैशाख माह की गणेश जी की कथा

पुराने समय की बात है, एक रतिदेव नाम के राजा हुआ करते थे और उनके राज्य में धर्मकेतु नाम का ब्राह्मण रहता था. धर्मकेतु की दो पत्नियाँ थी, एक का नाम सुशीला तो दूसरी का नाम चंचलता था. दोनो ही पत्नियों के व्यवहार और विचारों में बहुत अंतर था. सुशीला धार्मिक प्रवृति की थी और…

भरणी नक्षत्र

भरणी नक्षत्र का मेष राशि में विस्तार 13 अंश(Degree) 20 कला (Minute) से 26 अंश 40 कला तक है. भरणी नक्षत्र के स्वामी ग्रह शुक्र हैं और एक सौम्य व शुभ ग्रह है. इस नक्षत्र के अन्तर्गत शिशु पालन केन्द्र, छोटे बच्चों की देखभाल के लिए केन्द्र, आया और नर्सरी विद्यालय के अध्यापक आते हैं….

अश्विनी नक्षत्र और व्यवसाय

अश्विनी नक्षत्र का विस्तार मेष राशि में शून्य से 13 अंश 20 कला तक है. इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है. अश्विनी नक्षत्र निम्नलिखित व्यवसायों का कारक है :- घुड़्सवार बनना, घोड़ों का प्रशिक्षक बनना, घोड़ों का जॉकी बनना, घोड़ों से संबंधित सभी कार्य. सभी प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं, कैमिस्ट या औषधि निर्माता, अस्पताल…

शून्य तिथियाँ

सूर्य और चन्द्रमा के बीच जब 12 डिग्री का अंतर होता है तब एक तिथि बनती है.  अमावस्या के बाद जब चन्द्रमा सूर्य से 12 अंश दूर पहुंचता है तो प्रतिपदा समाप्त होती है. इस प्रकार 30 तिथियों का निर्माण होता है और इस तरह से एक चन्द्र मास बनता है. हिन्दु ज्योतिष में एक…

हनुमान जी को सिंदूर लगाने की परंपरा  

कहा जाता है कि श्री रामचन्द्र जी का राज्याभिषेक होने के बाद एक मंगलवार की सुबह की बात है कि हनुमान जी को भूख लगी तो वे माता जानकी (सीता जी) के पास कुछ कलेवा लेने पहुंचे. जब वह सीता माता के पास पहुंचे तब उनकी माँग में सिन्दूर लगा देखते हैं जिससे उन्हें थोड़ा…

हाथ देखने के नियम

हाथ देखने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना जरुरी है कि हाथ की बनावट कैसी है, हाथ की त्वचा कैसी है अथवा हाथ की त्वचा किस तरह का रंग लिए है आदि बातें हैं जिनका जानना जरूरी होता है. इस लेख के माध्यम से ऎसी ही कुछ बातों पर रोशनी डाली जाएगी.   हाथ…

हस्तलिपि के बारे में सामान्य बातें

हस्तलिपि (Handwriting) के बारे में बात की जाए तो हरेक व्यक्ति की अपनी विशेष लिखाई होती है और यही लिखाई सभी को भिन्न बनाती है. लिखाई के आधार पर व्यक्ति विशेष के बारे में कुछ बातों को जाना जा सकता है जिससे उसके स्वभाव के बारे में पता किया जा सकता है. इस लेख के…

होली पूजन से जुड़े चमत्कारिक उपाय

  होलिका पूजन फाल्गुन माह की पूर्णिमा को किया जाता है. होलिका दहन से पूर्व होलिका का पूजन किया जाता है और अगले दिन होली का त्यौहार रंगों से खेलकर मनाया जाता है. होली से जुड़े कई उपाय हैं जिन्हें करने से पीड़ित व्यक्ति की समस्याओं का हल हो सकता हैं उनमें से कुछ उपाय…

हस्ताक्षर से व्यक्तित्व का आंकलन

स्कूल में जब बच्चा पढ़ना शुरु करता है तब अध्यापक सभी बच्चों को समान रुप से लिखना सिखाते हैं लेकिन इसके बावजूद हरेक बच्चे की लिखाई अलग हो जाती है. बड़े होते-होते तो लिखाई एक नया रुप ही ले लेती है. इसी तरह से हर व्यक्ति के अपने अलग अंदाज के हस्ताक्षर होते हैं जो…