गणपतिस्तोत्रम

निर्विघ्नार्थं हरीशाद्या देवा अपि भजन्ति यम । मर्त्यै: स वक्रतुण्डोsर्च्य इति गाणेशसम्मतम ।।1।।   जगत्सृष्ट्यादिहेतु: सा वरा श्रुत्युक्तदेवता । गणानां त्वेति मन्त्रेण स्तुतो गृत्समदर्षिणा ।।2।।   इत्युक्तं तत्पुराणेsतो गणेशो ब्रह्मणस्पति: । महाकविर्ज्येष्ठराज: श्रूयते मन्त्रकृच्च स: ।।3।।   मन्त्रं वदत्युक्थमेष प्रनूनं ब्रह्मणस्पति: । यस्मिन्निन्द्रादय: सर्वे देवा ओकांसि चक्रिरे ।।4।।   स प्रभु: सर्वत: पाता यो रेवान्यो…

नक्षत्र, राशि, वर्ण, योनि आदि का ज्ञान चक्र

जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है तब सर्वप्रथम उसका नक्षत्र चरण देखा जाता है कि वह क्या है. नक्षत्र के आधार पर ही बच्चे की जन्म कुण्डली की बहुत सी बाते निर्भर होती हैं. कौन सा नक्षत्र है, नक्षत्र का स्वामी कौन है क्योंकि नक्षत्र के स्वामी की ही दशा से बच्चे का…

श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम

ईश्वर उवाच शतनाम प्रवक्ष्यामि श्रृणुष्व कमलानने । यस्य प्रसादमात्रेण दुर्गा प्रीता भवेत सती ।।1।। ऊँ सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी । आर्या दुर्गा जया चाद्या त्रिनेत्रा शूलधारिणी ।।2।। पिनाकधारिणी चित्रा चण्डघण्टा महातपा: । मनो बुद्धिरहंकारा चित्तरूपा चिता चिति: ।।3।। सर्वमन्त्रमयी सत्ता सत्यानन्दस्वरूपिणी । अनन्ता भाविनी भाव्या भव्याभव्या सदागति: ।।4।। शाम्भवी देवमाता च चिन्ता रत्नप्रिया सदा…

ग्रहों का रंग और उनसे संबंधित धातु

  ग्रह रंग धातु सूर्य केसरिया तांबा चंद्रमा सफेद चांदी मंगल लाल तांबा बुध हरा स्वर्ण व कांसा गुरु पीला स्वर्ण शुक्र सफेद चांदी शनि काला लोहा राहु रंग बिरंगा लोहा केतु धूम्र वर्ण चांदी

जन्म कुंडली के भावों में मांदि अथवा गुलिक का प्रभाव

सभी ग्रहों के अपने-अपने उपग्रह होते हैं जो अप्रकाशित होते हैं. इन सभी नौ ग्रहों में से सबसे अधिक महत्व शनि का उपग्रह गुलिक रखता हैं. गुलिक को मांदि के नाम से भी जाना जाता है. जन्म कुंडली की विभिन्न गणनाओं में इसका अपना स्वतंत्र रुप से महत्वपूर्ण स्थान है. कुंडली में यह अत्यधिक अशुभ…

आवश्यक मुहूर्त विचार

जन्म के समय से ही संस्कारों अथवा मुहूर्तों का चयन भिन्न-भिन्न कामों के लिए किया जाता है. जन्म के बाद नामकरण मुहूर्त, मुंडन मुहूर्त, विद्यारंभ मुहूर्त, विवाह मुहूर्त, नौकरी का मुहूर्त और ना जाने कितनी ही बाते हैं जिनके आरंभ से पहले शुभ समय पर विचार करना आवश्यक समझा जाता है. वर्तमान समय में बहुत…

श्रीगणपतिस्तोत्रम

जो मनुष्य भक्ति तथा श्रद्धा भाव से इस गणपति स्तोत्रम का पाठ नियमित रुप से करता है, स्वयं लक्ष्मी जी कभी उसकी देह-गेह को छोड़कर नहीं जाती हैं.   ऊँ नमो विघ्नराजाय सर्वसौख्यप्रदायिने । दुष्टारिष्टविनाशाय पराय परमात्मने ।।1।। लम्बोदरं महावीर्यं नागयज्ञोपशोभितम् । अर्धचन्द्रधरं देवं विघ्नव्यूहविनाशनम् ।।2।। ऊँ ह्राँ ह्रीं ह्रूँ ह्रैं ह्रौं ह्र: हरेम्बाय नमो…

तर्जनी अंगुली के पोरों(Phalanges) का अध्ययन

तर्जनी अंगुली का पहला पोर(1st Phalanx) हर अंगुली में मुख्य रुप से तीन पर्व होते हैं और आपकी तर्जनी अंगुली भी मुख्य रुप से तीन मुख्य भागों में बंटी होती है. इस अंगुली के सबसे ऊपर के नाखून वाले भाग को पहला पर्व कहा जाता है. यदि यह पर्व अंगुली के अन्य दो पर्वों से बड़ा…

हस्तरेखा शास्त्र में “वाया लेसीवा(लासिवा) अथवा असंयम रेखा” का महत्व

इस रेखा के विषय में अनेक मतभेद पाए गए हैं. कई विद्वान इसे बुध रेखा या चन्द्र रेखा के समानांतर एक छोटी रेखा मानते हैं. यह रेखा बुध रेखा को एक तरह से विशेष शक्ति प्रदान करती है और यह शक्ति केवल और केवल अधिक कामुकता के रुप में सामने आती है. मतांतर से कुछ…

श्रीदेवी जी की आरती

जगजननी जय ! जय ! माँ ! जगजननी जय ! जय ! भयहारिणि, भवतारिणि, भवभामिनि जय ! जय !! जगo   तू ही सत-चित-सुखमय शुद्ध ब्रह्मरुपा । सत्य सनातन सुन्दर पर-शिव सुर-भूपा ।।1।। जगo   आदि अनादि अनामय अविचल अविनाशी । अमल अनन्त अगोचर अज आनँदराशी ।।2।। जगo   अविकारी, अघहारी, अकल, कलाधारी । कर्त्ता…

अष्टकवर्ग के द्वारा जन्म कुण्डली का निरीक्षण

ज्योतिष में फलकथन करने के बहुत से नियम व योग होते हैं. सभी का सूक्ष्मता से अध्ययन करने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचना चाहिए. जन्म कुण्डली की विवेचना में अष्टकवर्ग की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है. अष्टकवर्ग के सिद्धांतो का सही प्रकार से उपयोग करने के बाद ही कुण्डली की विवेचना…