गणपतिस्तोत्रम

निर्विघ्नार्थं हरीशाद्या देवा अपि भजन्ति यम । मर्त्यै: स वक्रतुण्डोsर्च्य इति गाणेशसम्मतम ।।1।।   जगत्सृष्ट्यादिहेतु: सा वरा श्रुत्युक्तदेवता । गणानां

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श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम

ईश्वर उवाच शतनाम प्रवक्ष्यामि श्रृणुष्व कमलानने । यस्य प्रसादमात्रेण दुर्गा प्रीता भवेत सती ।।1।। ऊँ सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी

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जन्म कुंडली के भावों में मांदि अथवा गुलिक का प्रभाव

सभी ग्रहों के अपने-अपने उपग्रह होते हैं जो अप्रकाशित होते हैं. इन सभी नौ ग्रहों में से सबसे अधिक महत्व

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हस्तरेखा शास्त्र में “वाया लेसीवा(लासिवा) अथवा असंयम रेखा” का महत्व

इस रेखा के विषय में अनेक मतभेद पाए गए हैं. कई विद्वान इसे बुध रेखा या चन्द्र रेखा के समानांतर

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