षष्ठी देवी स्तोत्र

षष्ठी देवी पूजा महत्व भगवती षष्ठी देवी शिशुओं की अधिष्ठात्री देवी हैं. जिन्हें संतान नहीं होती, उन्हें यह संतान देती है, संतान को दीर्घायु प्रदान करती हैं. बच्चों की रक्षा करना भी इनका स्वाभाविक गुण धर्म है. मूल प्रकृति के छठे अंश से यह प्रकट हुई हैं तभी इनका नाम षष्ठी देवी पड़ा है. ये…

अंगूठे का अध्ययन

हस्त रेखा शास्त्र में अंगूठे का अत्यधिक महत्व माना गया है. इसे हथेली का राजा कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. अगर अंगूठा ना हो तो हम इसके बिना किसी काम के करने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं. आज के इस लेख में हम आपको अंगूठे की विशेषताओ के बारे में बताएंगें…

ललितापंचकम्

प्रात: स्मरामि ललितावदनारविन्दं विम्बाधरं पृथुलमौक्तिकशोभिनासम् । आकर्णदीर्घनयनं मणिकुण्डलाढ़्यं मन्दस्मितं मृगमदोज्ज्वलभालदेशम् ।।1।।   प्रातर्भजामि ललिताभुजकल्पवल्लीं रक्तांगुलीयलसदंगुलिपल्लवाढ़्याम् । माणिक्यहेमवलयांगदशोभमानां पुण्ड्रेक्षुचापकुसुमेषुसृणीदधानाम् ।।2।।   प्रातर्नमामि ललिताचरणारविन्दं भक्तेष्टदाननिरतं भवसिन्धुपोतम् । पद्मासनादिसुरनायकपूजनीयं पद्मांकुशध्वजसुदर्शनलांछनाढ़्यम् ।।3।।   प्रात: स्तुवे परशिवां ललितां भवानीं त्रय्यन्तवेद्यविभवां करुणानवद्याम् विश्वस्य सृष्टिविलयस्थितिहेतुभूतां विद्येश्वरीं निगमवाड़्मनसातिदूराम् ।।4।।   प्रातर्वदामि ललिते तव पुण्यनाम कामेश्वरीति कमलेति महेश्वरीति । श्रीशाम्भवीति जगतां जननी परेति वाग्देवतेति…

दुर्गास्तुति:

श्रीमहाभागवत पुराण के अन्तर्गत वेदों द्वारा की गई दुर्गा स्तुति   श्रुतय ऊचु: दुर्गे विश्वमपि प्रसीद परमे सृष्ट्यादिकार्यत्रये ब्रह्माद्या: पुरुषास्त्रयो निजगुणैस्त्वत्स्वेच्छया कल्पिता: । नो ते कोsपि च कल्पकोsत्र भुवने विद्येत मातर्यत: क: शक्त: परिवर्णितुं तव गुणाँल्लोके भवेद्दुर्गमान ।।1।।   त्वामाराध्य हरिर्निहत्य समरे दैत्यान रणे दुर्जयान त्रैलोक्यं परिपाति शम्भुरपि ते धृत्वा पदं वक्षसि । त्रैलोक्यक्षयकारकं समपिबद्यत्कालकूटं…

ग्रह और उनकी मित्रता

सभी ग्रहों की अन्य ग्रहों से नैसर्गिक मित्रता होती है जिससे वह एक-दूसरे से मित्र, शत्रु व समता का भाव रखते हैं. ग्रहों की यह मैत्री फलादेश में बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि कोई भी ग्रह तभी अच्छा कहा जाएगा जब वह अपनी उच्च, स्वराशि,मूलत्रिकोण राशि अथवा मित्र राशि में स्थित होगा. अच्छा होना…

श्रीसंकटनाशनगणेश स्तोत्रम

नारद उवाच प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम । भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायु:कामार्थसिद्धये ।।1।।   प्रथमं वक्रतुंण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम । तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ।।2।।   लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च । सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्टमम ।।3।।   नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु गजाननम । एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ।।4।।   द्वादशैतानि नामामि त्रिसन्ध्यं…

श्रीगणेशद्वादशनामस्तोत्रम

सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णक: । लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायक: ।।1।। धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजानन: । द्वादशैतानि नामानि य: पठेच्छृणुयादपि ।।2।। विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा । संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते ।।3।।   ।।इति श्रीगणेशद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम।।   हिन्दी अनुवाद सुमुख, एकदन्त, कपिल, गजकर्ण, लम्बोदर, विकट, विघ्ननाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र और गजानन, ये सभी गणेश…

तत्वों के अनुसार राशियों का वर्गीकरण

तत्वों के आधार पर सभी बारह राशियों को चार भागों में बाँटा गया है. यह चार तत्व अग्नि,पृथ्वी, वायु तथा जल है. जो राशि जिस तत्व में आती है उसका स्वभाव भी उस तत्व के गुण धर्म के अनुसार हो जाता है. उदाहरण के लिए किसी जातक की राशि जलतत्व है तब उसके स्वभाव में…

श्रीगणेश जी के विभिन्न स्वरुपों का ध्यान

भगवान गणेश – Lord Ganesha  सिन्दूरवर्णं द्विभुजं गणेशं लम्बोदरं पद्मदले निविष्टम । ब्रह्मादिदेवै: परिसेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणमामि देवम ।।   हिन्दी अनुवाद   भगवान गणेश की अंगकान्ति सिन्दूर के समान है, उनकी दो भुजाएँ हैं, वे लम्बोदर हैं और कमल दल पर विराजमान हैं. ब्रह्मा आदि देवता उनकी सेवा में लगे हैं और वे सिद्धसमुदाय…

गायत्री स्तोत्रम

महेश्वर उवाच जयस्व देवि गायत्रि महामाये महाप्रभे । महादेवि महाभागे महासत्त्वे महोत्सवे ।।1।। दिव्यगन्धानुलिप्ताड़्गि दिव्यस्त्रग्दामभूषिते । वेदमातर्नमस्तुभ्यं त्र्यक्षरस्थे महेश्वरि ।।2।। त्रिलोकस्थे त्रितत्वस्थे त्रिवह्निस्थे त्रिशूलनि । त्रिनेत्रे भीमवक्त्रे च भीमनेत्रे भयानके ।।3।। कमलासनजे देवि सरस्वति नमोSस्तु ते । नम: पंकजपत्राक्षि महामायेSमृतस्त्रवे ।।4।। सर्वगे सर्वभूतेशि स्वाहाकारे स्वधेsम्बिके । सम्पूर्णे पूर्णचन्द्राभे भास्वरांगे भवोद्भवे ।।5।। महाविद्ये महावेद्ये महादैत्यविनाशिनी ।…

शब्दकोश

जन्म कुंडली अथवा लग्न कुंडली – Birth Chart Or Lagna Kundali किसी भी व्यक्ति के जन्म के समय आकाश में ग्रह नक्षत्रों की जो स्थिति होती है उसे जन्म अथवा लग्न कुंडली कहा जाता है अथवा जन्म के समय आकाशीय नक्शे को जन्म कुंडली कहा जाता है. जन्म के समय के ग्रहों की स्थिति को…

कामाक्षी माहात्म्यम

स्वामिपुष्करिणीतीर्थं पूर्वसिन्धुः पिनाकिनी। शिलाह्रदश्चतुर्मध्यं यावत् तुण्डीरमण्डलम् ।।1।।   मध्ये तुण्डीरभूवृत्तं कम्पा-वेगवती-द्वयोः। तयोर्मध्यं कामकोष्ठं कामाक्षी तत्र वर्तते ।।2।।   स एव विग्रहो देव्या मूलभूतोऽद्रिराड्भुवः। नान्योऽस्ति विग्रहो देव्याः काञ्च्यां तन्मूलविग्रहः ।।3।।   जगत्कामकलाकारं नाभिस्थानं भुवः परम्। पदपद्मस्य कामाक्ष्याः महापीठमुपास्महे ।।4।।   कामकोटिः स्मृतः सोऽयं कारणादेव चिन्नभः। यत्र कामकृतो धर्मो जन्तुना येन केन वा। सकृद्वाऽपि सुधर्माणां फलं फलति…