श्री राधाकृपाकटाक्षस्तवराज

मुनीन्द्र-वृन्द वन्दिते त्रिलोक-शोक-हारिणि प्रसन्न-वक्त्र-पंकजे निकुंज-भू-विलासिनि । व्रजेन्द्र-भानु-नन्दिनि व्रजेन्द्र-सूनु-संगते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम ।।1।। अशोक-वृक्ष-वल्लरी-वितान-मण्डप-स्थिते प्रवाल-बालपल्लव-प्रभारूणाड़्घ्रि-कोमले । वराभय-स्फुरत-करे प्रभूत-सम्पदालये कदा करिष्यसीहे

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लिंगाष्टकम

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिंग निर्मलभासित शोभितलिंगम । जन्मजदु:खविनाशकलिंगं तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम ।।1।। देवमुनिप्रवरार्चितलिंगं कामदहं करुणाकरलिंगम । रावणदर्पविनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम ।।2।। सर्वसुगंधिसुलेपित लिंगं बुद्धि

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श्री गंगा स्तोत्रम

देवि सुरेश्वरि भगति गंगे त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे । शंकरमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ।।1।। भागीरथि सुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यात:

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सूर्य भगवान के 108 नाम

सूर्योsर्यमा भगस्त्वष्टा पूषार्क: सविता रवि: । गभस्तिमानज: कालो मृत्युर्धाता प्रभाकर: ।।1।। पृथिव्यापश्च तेजश्च खं वयुश्च परायणम । सोमो बृहस्पति: शुक्रो

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श्रीगोपाल सहस्त्रनाम स्तोत्रम्

अथ ध्यानम कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्ष:स्थले कौस्तुभं नासाग्रे वरमौत्तिकं करतले वेणुं करे कंकणम । सर्वाड़्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलि –

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