द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम – Dwadash Jyotirlingam Stotram

इस स्तोत्र का जप जो भी व्यक्ति प्रतिदिन करता है उसे बारह ज्योतिर्लिंगो जैसे दर्शन करने के समान फल की प्राप्ति होती है. केवल यही एक स्तोत्र है जिसका जाप करने से व्यक्ति को शिव भगवान की कृपा तो प्राप्त होती ही है साथ ही अन्य सभी देवी देवताओ की कृपा भी प्राप्त होती है….

रामायण – मनका 108

इस पाठ की एक माला प्रतिदिन करने से मनोकामना पूर्ण होती है, ऎसा माना गया है. रघुपति राघव राजाराम । पतितपावन सीताराम ।। जय रघुनन्दन जय घनश्याम । पतितपावन सीताराम ।। भीड़ पड़ी जब भक्त पुकारे । दूर करो प्रभु दु:ख हमारे ।। दशरथ के घर जन्मे राम । पतितपावन सीताराम ।। 1 ।। विश्वामित्र…

श्री राधाकृपाकटाक्षस्तवराज

मुनीन्द्र-वृन्द वन्दिते त्रिलोक-शोक-हारिणि प्रसन्न-वक्त्र-पंकजे निकुंज-भू-विलासिनि । व्रजेन्द्र-भानु-नन्दिनि व्रजेन्द्र-सूनु-संगते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम ।।1।। अशोक-वृक्ष-वल्लरी-वितान-मण्डप-स्थिते प्रवाल-बालपल्लव-प्रभारूणाड़्घ्रि-कोमले । वराभय-स्फुरत-करे प्रभूत-सम्पदालये कदा करिष्यसीहे मां कृपाकटाक्ष भाजनम ।।2।। अनंग – रंग – मंगल – प्रसंग – भंड़्गुरभ्रुवो: सविभ्रमं ससम्भ्रमं दृगन्त – बाण – पातनै: । निरन्तरं वशीकृत-प्रतीत-नन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष भाजनम ।।3।। तडित-सुवर्ण-चम्पक-प्रदीप्त-गौर-विग्रहे मुख-प्रभा-परास्त-कोटि-शारदेन्दुमण्डले । विचित्र-चित्र-संचरच्चकोर-शाव-लोचने कदा करिष्यसीह…

लिंगाष्टकम

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिंग निर्मलभासित शोभितलिंगम । जन्मजदु:खविनाशकलिंगं तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम ।।1।। देवमुनिप्रवरार्चितलिंगं कामदहं करुणाकरलिंगम । रावणदर्पविनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम ।।2।। सर्वसुगंधिसुलेपित लिंगं बुद्धि विवर्धनकारणलिंगम । सिद्धसुरासुरवंदितलिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम ।।3।। कनकमहामणिभूषितलिंगं फणिपति वेष्टित शोभितलिंगम । दक्षसुयज्ञविनाशकलिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम ।।4।। कुंकुमचन्दनलेपितलिंगंं पंकजहारसुशोभितलिंगम । संचितपापविनाशनलिंगं तत्प्रणमामि सदा शिवलिंगम ।।5।। देवगणार्चितसेवितलिंगं भावैर्भक्तिभिरेव च लिंगम । दिनकरकोटिप्रभाकर लिंगम पत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम ।।6।।…

श्री गंगा स्तोत्रम

देवि सुरेश्वरि भगति गंगे त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे । शंकरमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ।।1।। भागीरथि सुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यात: । नाहं जाने तव महिमानं पाहि कृपामयि मामज्ञानम ।।2।। हरिपदपाद्यतरंगिणि गंगे हिमविधुमुक्ताधवलतरंगे । दूरीकुरू मम दुष्कृतिभारं कुरु कृपया भवसागरपारम ।।3।। तव जलममलं येन निपीतं परमपदं खलु तेन गृहीतम । मातर्गंगे त्वयि यो भक्त: किल तं…

सूर्य भगवान के 108 नाम

सूर्योsर्यमा भगस्त्वष्टा पूषार्क: सविता रवि: । गभस्तिमानज: कालो मृत्युर्धाता प्रभाकर: ।।1।। पृथिव्यापश्च तेजश्च खं वयुश्च परायणम । सोमो बृहस्पति: शुक्रो बुधोsड़्गारक एव च ।।2।। इन्द्रो विश्वस्वान दीप्तांशु: शुचि: शौरि: शनैश्चर: । ब्रह्मा विष्णुश्च रुद्रश्च स्कन्दो वरुणो यम: ।।3।। वैद्युतो जाठरश्चाग्निरैन्धनस्तेजसां पति: । धर्मध्वजो वेदकर्ता वेदाड़्गो वेदवाहन: ।।4।। कृतं तत्र द्वापरश्च कलि: सर्वमलाश्रय: । कला काष्ठा…

श्रीगोपाल सहस्त्रनाम स्तोत्रम्

अथ ध्यानम कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्ष:स्थले कौस्तुभं नासाग्रे वरमौत्तिकं करतले वेणुं करे कंकणम । सर्वाड़्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलि – र्गोपस्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणि: ।।1।। फुल्लेन्दीवरकान्तिमिन्दुवदनं बर्हावतंसप्रियं श्रीवत्साड़्कमुदारकौस्तुभधरं पीताम्बरं सुन्दरम । गोपीनां नयनोत्पलार्चिततनुं गोगोपसंघावृतं गोविन्दं कलवेणुवादनपरं दिव्याड़्गभूषं भजे ।।2।। इति ध्यानम ऊँ क्लीं देव: कामदेव: कामबीजशिरोमणि: । श्रीगोपालको महीपाल: सर्वव्र्दान्तपरग: ।।1।। धरणीपालको धन्य: पुण्डरीक: सनातन: ।…

श्रीदुर्गा जी की आरती

जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ।। मांग सिंदूर विराजत, टीको मृदमद को । उज्जवल से दोउ नैना, चंद्र बदन नीको ।। कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै । रक्त पुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजै ।। केहरि वाहन राजत, खड़्ग खप्पर धारी । सुर नर मुनिजन सेवत, तिनके…

आरती शिवजी की

जय शिव ओंकारा, हर जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा ।। जय शिव…. एकानन चतुरानन पंचानन राजे । हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ।। जय शिव…… दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज ते सोहे । तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहे ।। जय शिव…. अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी । चंदन मृगमद सोहे भोले…

संकष्टमोचन स्तोत्रम

सिन्दूरपूररुचिरो बलवीर्यसिन्धु – र्बुद्धिप्रवाहनिधिरद्भुतवैभवश्री: । दीनार्तिदावदहनो वरदो वरेण्य: संकष्टमोचनविभुस्तनुतां शुभं न: ।। सोत्साहलड़्घितमहार्णवपौरुषश्री – र्लड़्कापुरीप्रदहनप्रथितप्रभाव: । घोराहवप्रमथितारिचमूप्रवीर: प्राभंजनिर्जयति मर्कटसार्वभौम: ।। द्रौणाचलानयनवर्णितभव्यभूति: श्रीरामलक्ष्मणसहायकचक्रवर्ती । काशीस्थदक्षिणविराजितसौधमल्ल: श्रीमारुतिर्विजयते भगवान महेश: ।। नूनं स्मृतोsपि दयते भजतां कपीन्द्र: सम्पूजितो दिशति वांछितसिद्धिवृद्धिम । सम्मोदकप्रिय उपैति परं प्रहर्षं रामायणश्रवणत: पठतां शरण्य: ।। श्रीभारतप्रवरयुद्धरथोद्धतश्री: पार्थैककेतनकरालविशालमूर्ति: । उच्चैर्घनाघनघटाविकटाट्टहास: श्रीकृष्णपक्षभरण: शरणं ममास्तु ।। जड़्घालजड़्घ उपमातिविदूरवेगो…

श्रीहनुमत्सहस्त्रनाम स्तोत्रम

हनुमान्श्रीप्रदो वायुपुत्रो रुद्रोsनघोsजर: । अमृत्युर्वीरवीरश्च ग्रामवासो जनाश्रय: ।।1।। धनदो निर्गुणोsकायो वीरो निधिपतिर्मुनि: । पिंड्गाक्षो वरदो वाग्मी सीताशोकविनाशन: ।।2।। शिव: सर्व: परोsव्यक्तो व्यक्ताव्यक्तो रसाधर: । पिंड्गकेश: पिंड्गरोमा श्रुतिगम्य: सनातन: ।।3।। अनादिर्भगवान देवो विश्वहेतुर्निरामय: । आरोग्यकर्ता विश्वेशो विश्वनाथो हरीश्वर: ।।4।। भर्गो रामो रामभक्त: कल्याणप्रकृति: स्थिर: । विश्वम्भरो विश्वमूर्तिर्विश्वाकारोsथ विश्वप: ।।5।। विश्वात्मा विश्वसेव्योsथ विश्वो विश्वहरो रवि: । विश्वचेष्टो…

श्रीराम स्तुति

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभव दारुणं । नवकंज-लोचन, कंजमुख, कर-कंज, पद कंजारुणं ।। कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरद-सुंदरं । पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं ।। भजु दीनबंधु दिनेश दानव-दैत्य-वंश-निकंदनं । रघुनंद आनंदकंद कोशलचंद दशरथ-नंदनं ।। सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणं । आजानुभुज शर-चाप-धर, संग्राम-जित-खर दूषणं ।। इति…