आरती रविवार की

कहं लगि आरती दास करेंगे, सकल जगत जाकी जोत विराजे, सात समुद्र जाके चरणनि बसे, कहा भये जल कुम्भ भरे हो राम, कोटि भानु जाके नख की शोभा, कहा भयो मन्दिर दीप धरे हो राम, भार अठारह रामा बलि जाके, कहा भयो शिर पुष्प धरे हो राम, छप्पन भोग जाके नितप्रति लागे, कहा भयो नैवेद्य…

आरती श्रीरामचन्द्र जी की

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं. नव कंजलोचन, कंज – मुख, कर – कंज, पद कंजारुणं.. कंन्दर्प अगणित अमित छबि नवनील – नीरद सुन्दरं. पटपीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमि जनक सुतवरं.. भजु दीनबंधु दिनेश दानव – दैत्यवंश – निकन्दंन. रधुनन्द आनंदकंद कौशलचन्द दशरथ – नन्दनं.. सिरा मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु…

आरती रामायण जी की

आरती श्री रामायणजी की.. कीरति कलित ललित सिय पी की.. गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद.. बालमीक बिग्यान बिसारद.. सुक सनकादि सेष और सारद.. बरन पवन्सुत कीरति नीकी.. गावत बेद पुरान अष्टदस.. छओं सास्त्र सब ग्रंथन को रस.. मुनि जन धन संतन को सरबस.. सार अंस सम्म्मत सब ही की.. गावत संतत संभु भवानी.. अरु घटसंभव मुनि…

गंगा माता जी की आरती

ॐ जय गंगे माता श्री जय गंगे माता… जो नर तुमको ध्याता मनवांछित फल पाता… चंद्र सी जोत तुम्हारी जल निर्मल आता… शरण पडें जो तेरी सो नर तर जाता … पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता… कृपा दृष्टि तुम्हारी त्रिभुवन सुख दाता… एक ही बार जो तेरी शारणागति आता… यम की त्रास…

आरती कुंजबिहारी की

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की……… गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला. श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला. गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली. लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…….. कनकमय मोर…

राहु के मंत्र

राहु का अपना कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता है. यह एक छाया ग्रह है लेकिन छाया ग्रह होते हुए भी कुण्डली पर अपना अत्यधिक प्रभाव बनाये रखता है. राहु सदा अशुभ प्रभाव नही देता है. आधुनिक समय में बहुत सी नई टेक्नोलॉजी राहु के अधिकार क्षेत्र में आती है. इालिए हम इसे सदा अशुभ नहीं…

शुक्र के लिए मंत्र

शुक्र के निर्बल होने से जीवन में भोग विलास की कमी हो सकती है. मूत्र संबंधी परेशानियाँ हो सकती है. ऎसी स्थिति में शुक्र के मंत्र जाप करने चाहिए. शुक्र के किसी एक मंत्र का जाप शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से आरंभ करना चाहिए. शुक्र के मंत्र जाप सूर्योदय काल में करने चाहिए. शुक्र का…

गुरु के लिए मंत्र

गुरु ग्रह ज्ञान, संतान तथा धन के नैसर्गिक कारक माने जाते हैं. जन्म कुंडली में इनकी स्थिति कमजोर होने से इनसे संबंधित बातों में कमी का अनुभव हो सकता है. इसलिए इनकी स्थिति को मजबूत करने के लिए गुरु ग्रह से संबंधित किसी भी एक मंत्र का जाप करना चाहिए. मंत्र जाप शुक्ल पक्ष के…

लक्ष्मी जी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता , मैया जय लक्ष्मी माता, तुमको निस दिन सेवत, हरी, विष्णु दाता ॐ जय लक्ष्मी माता उमा राम ब्रह्माणी, तुम ही जग माता, मैया, तुम ही जग माता , सूर्यचंद्र माँ ध्यावत, नारद ऋषि गाता . ॐ जय लक्ष्मी माता . दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पति दाता, मैया सुख सम्पति दाता…

चन्द्रमा के लिए मंत्र

वैदिक ज्योतिष और पौराणिक शास्त्रों में बहुत से मंत्रो का वर्णन हमें मिलता है. जन्म कुंडली में यदि चन्द्रमा शुभ होकर निर्बल अवस्था में है तब चंद्रमा के किसी भी एक मंत्र का जाप शुक्ल पक्ष के सोमवार अथवा पूर्णमासी से शुरु करना चाहिए. चन्द्रमा के मंत्र का जाप रात्रि समय में ही करना चाहिए….

सूर्य के लिए मंत्र

भारतवर्ष में सभी धर्मो के लोग अपने अपने धर्म के अनुसार कोई न कोई प्रार्थना अथवा मंत्र जाप अवश्य करते हैं.  हिन्दु धर्म में मंत्र जाप की कोई गिनती ही नहीं है. मंत्र जाप की कड़ी में आज हम आपको सूर्य से संबंधित मंत्र बताएंगे. सूर्य के किसी भी मंत्र का जाप व्यक्ति को अपनी…

श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्रम

ॐ श्री परमात्मने नमः । ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । अथ श्रीविष्णुसहस्त्रनाम स्तोत्रम यस्य स्मरणमात्रेन जन्मसंसारबन्धनात्‌ । विमुच्यते नमस्तमै विष्णवे प्रभविष्णवे ॥ नमः समस्तभूतानां आदिभूताय भूभृते । अनेकरुपरुपाय विष्णवे प्रभविष्णवे ॥ वैशम्पायन उवाच श्रुत्वा धर्मानशेषेण पावनानि च सर्वशः । युधिष्टिरः शान्तनवं पुनरेवाभ्यभाषत ।१। युधिष्टिर उवाच किमेकं दैवतं लोके किं वाप्येकं परायणम्‌ । स्तुवन्तः कं कमर्चन्तः…